National Pension System (NPS) का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। अब इसका एसेट बेस **₹17.7 लाख करोड़** के पार निकल गया है और सब्सक्राइबर्स की संख्या में **27%** की बढ़ोतरी हुई है।
अब केवल टैक्स सेविंग नहीं, हेल्थ का भी भरोसा
पेंशन रेग्युलेटर PFRDA अब NPS को केवल टैक्स बचाने वाले एक साधन के रूप में नहीं, बल्कि एक होलिसटिक फाइनेंशियल प्लानिंग टूल के तौर पर देख रहा है। इसी कड़ी में 18 सितंबर 2026 को 'NPS Swasthya' स्कीम की शुरुआत की गई है। यह स्कीम सब्सक्राइबर के पेंशन अकाउंट को हेल्थ इंश्योरेंस के साथ जोड़ती है, ताकि मेडिकल खर्चों के लिए उन्हें अपना रिटायरमेंट कॉर्पस न तोड़ना पड़े।
पारदर्शिता और रिस्क का नया गणित
निवेशकों को स्कीम के रिस्क को समझाने के लिए PFRDA ने 28 अगस्त 2026 से 'A-to-E' क्लासिफिकेशन फ्रेमवर्क पेश किया है। इससे सब्सक्राइबर आसानी से समझ सकेंगे कि उनके पैसे का कितना हिस्सा इक्विटी में है। यह कदम MSMEs और छोटे शहरों के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उठाया गया है।
रिस्क और ध्यान रखने वाली बातें
निवेशकों को यह समझना होगा कि NPS मार्केट-लिंक्ड है, इसलिए रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। साथ ही, देश में हेल्थकेयर इन्फ्लेशन 11% से 14% की रफ्तार से बढ़ रही है। यदि आपके निवेश का रिटर्न इस महंगाई दर को नहीं पछाड़ पाता है, तो भविष्य में फंड कम पड़ सकता है। इसके अलावा, 'NPS Swasthya' जैसे फीचर्स के साथ अब आपको प्रीमियम पेमेंट और पॉलिसी के नियमों को भी बारीकी से समझना होगा, क्योंकि प्रीमियम भरने में चूक होने पर कवरेज मिलने में समस्या हो सकती है।
