PFRDA ने National Pension System (NPS) के लिए एक बड़ा लक्ष्य रखा है। अथॉरिटी अब UPI और डिजिटल माध्यमों के जरिए एसेट्स को ₹100 लाख करोड़ तक पहुंचाने की तैयारी में है। निवेशकों के लिए अब इक्विटी में निवेश के मौके बढ़ गए हैं, लेकिन बाजार के रिस्क को समझना भी जरूरी है।
डिजिटल क्रांति से आसान होगा निवेश
Pension Fund Regulatory and Development Authority (PFRDA) ने साल 2040 तक ₹100 लाख करोड़ का विशाल कॉर्पस जुटाने का रोडमैप तैयार किया है। चेयरमैन S. Ramann के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 'डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन' मुख्य जरिया होगा। PFRDA, National Payments Corporation of India (NPCI) के साथ मिलकर UPI के जरिए NPS ऑनबोर्डिंग को बेहद आसान बनाने की योजना बना रहा है। इससे मैनुअल काम कम होगा और बैंकिंग पार्टनर्स के लिए गिग और इनफॉर्मल सेक्टर के वर्कर्स तक पहुंचना सस्ता और तेज हो जाएगा।
इक्विटी में अब मिल रही है ज्यादा छूट
निवेश के नजरिए से बड़ा बदलाव अक्टूबर 2025 से हुआ है। 'Multiple Scheme Framework' (MSF) के तहत अब नॉन-गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स को 100% तक इक्विटी में निवेश करने की आजादी मिल गई है। पहले जहां निवेश का बड़ा हिस्सा केवल डेट (Debt) में रहता था, वहीं अब लंबी अवधि के लिए बाजार का फायदा उठाने का मौका है।
रिस्क फैक्टर को नजरअंदाज न करें
हालांकि ज्यादा इक्विटी एक्सपोजर से रिटर्न की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन इसके साथ मार्केट वोलेटिलिटी (Volatility) का रिस्क भी जुड़ गया है। यदि रिटायरमेंट के पास बाजार में गिरावट आती है, तो कॉर्पस की वैल्यू पर बड़ा असर पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि निवेशकों को अपनी उम्र और जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से समय-समय पर रीबैलेंसिंग (Rebalancing) करते रहना चाहिए, ताकि रिटायरमेंट के समय फंड की कमी न हो।
फीस स्ट्रक्चर में बदलाव
इसके अलावा, 1 अप्रैल 2026 से PFRDA ने इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट के लिए नया स्लैब-आधारित फीस स्ट्रक्चर लागू किया है। यह बदलाव फंड मैनेजमेंट की लागत को कम करने और दक्षता बढ़ाने के लिए किया गया है। आने वाले समय में निवेशकों को इन सुधारों और मार्केट साइकिल के बीच NPS के परफॉर्मेंस पर पैनी नजर रखनी होगी।
