National Payments Corporation of India (NPCI) जल्द ही 'Unified Agent Protocol' (UAP) लॉन्च करने की तैयारी में है। इस नई व्यवस्था के जरिए AI असिस्टेंट्स अब इंसानी दखल के बिना खुद UPI पेमेंट कर सकेंगे।
भारत में डिजिटल पेमेंट का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) एक ऐसे फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है, जिसे 'Unified Agent Protocol' (UAP) कहा जा रहा है। इसका मकसद AI एजेंट्स को ऑटोनॉमस तरीके से UPI ट्रांजेक्शन करने की अनुमति देना है। अभी तक UPI के हर ट्रांजेक्शन के लिए यूजर को मैन्युअली PIN डालना पड़ता है, लेकिन UAP आने के बाद यह प्रक्रिया AI असिस्टेंट्स के भरोसे हो जाएगी।
यह कैसे काम करेगा?
यह पूरा सिस्टम दो मौजूदा फीचर्स—'UPI Circle' और 'Reserve Pay' पर आधारित होगा। 'UPI Circle' के जरिए यूजर अपने पेमेंट का अधिकार AI को दे सकेगा, जबकि 'Reserve Pay' एक ऐसा मैकेनिज्म है जो भविष्य के खर्चों के लिए फंड्स को सुरक्षित (ring-fenced) रखता है। फिलहाल Reserve Pay के तहत ₹10,000 की लिमिट तय है, जिसे 90 दिनों के लिए रखा जाता है। माना जा रहा है कि AI-driven कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए NPCI जल्द ही इन लिमिट्स में बड़े बदलाव कर सकता है।
बाजार में बढ़ती हलचल
इस स्पेस में केवल NPCI ही नहीं, बल्कि प्राइवेट प्लेयर्स भी तेजी दिखा रहे हैं। Pine Labs पहले ही अपना 'P3P' प्रोटोकॉल ला चुका है। वहीं, ग्लोबल दिग्गज जैसे Mastercard और Visa भी इस उभरते बाजार को हथियाने के लिए अपनी तकनीक तैयार कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
AI-driven पेमेंट के साथ ही सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। अगर AI एजेंट्स में कोई तकनीकी खराबी आती है या 'rogue' एजेंट्स अनधिकृत ट्रांजेक्शन करते हैं, तो उसका खामियाजा किसे भुगतना पड़ेगा? इन सब सवालों के जवाब में एक मजबूत लायबिलिटी फ्रेमवर्क और कड़े ऑडिट ट्रेल्स की जरूरत होगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और NPCI की नजर इस पर टिकी है कि कैसे ट्रांजेक्शन लिमिट्स को बढ़ाकर डिजिटल पेमेंट के वॉल्यूम को सुरक्षित तरीके से बढ़ाया जाए। इंडस्ट्री के जानकार अब 'Global Fintech Fest' के दौरान इस पर बड़े अपडेट की उम्मीद कर रहे हैं।
