NPCI ने UPI ट्रांजेक्शन को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब **₹2,000** से ज्यादा के भुगतान पर **0.4%** का चार्ज लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा **₹300** तय की गई है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI के लिए नई प्राइसिंग स्ट्रक्चर का ऐलान कर दिया है। इसके तहत, अब मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4% का शुल्क वसूला जाएगा, जो ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर लागू होगा। वहीं, ₹75,000 या उससे ज्यादा के बड़े ट्रांजेक्शन के लिए इसे ₹300 पर कैप (Cap) कर दिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि सिक्योरिटी और फ्रॉड डिटेक्शन टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाया जा सके।
बैंक और रेवेन्यू शेयरिंग का गणित
इस शुल्क से होने वाली कमाई सीधे पेमेंट ऐप्स के पास नहीं जाएगी। एक रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल बनाया गया है, जिसमें रेमिटर बैंक (भेजने वाला बैंक) और एक्वायरिंग एंटिटी (प्राप्त करने वाला बैंक) को लगभग 35% हिस्सा मिलेगा। शेष हिस्सा उन थर्ड-पार्टी पेमेंट ऐप्स को जाएगा जो इंटरफेस मुहैया कराते हैं। यह ढांचा उन बैंकों को रिवॉर्ड देने के लिए बनाया गया है जो इस पूरे फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ हैं।
मर्चेंट्स और कंज्यूमर्स पर क्या होगा असर?
बड़े रिटेलर्स के लिए यह लागत झेलना आसान हो सकता है, लेकिन छोटे व्यापारियों के मार्जिन पर इसका दबाव दिख सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या व्यापारी इस लागत को ग्राहकों पर डालेंगे या इसे बिजनेस की सामान्य लागत मानकर खुद वहन करेंगे? अगर ग्राहक पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, तो बड़े पेमेंट के लिए UPI के इस्तेमाल में कमी आ सकती है।
फिनटेक इंडस्ट्री के लिए नई राह
यह बदलाव फिनटेक कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। अभी तक ये कंपनियां केवल ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर निर्भर थीं, लेकिन अब उनके लिए प्रॉफिटेबिलिटी का रास्ता साफ हो रहा है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह सेक्टर और अधिक आकर्षक हो सकता है, क्योंकि यह कंपनियों को अपनी बैलेंस शीट मजबूत करने और बाहरी फंडिंग पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
