देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को संभालने वाली NPCI का FY26 का मुनाफा **12%** घटकर **₹1,362 करोड़** रह गया है, जबकि कंपनी की कुल आय **21%** बढ़कर **₹3,969 करोड़** पर पहुंच गई है। एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर और मार्केटिंग पर बढ़ते खर्च के कारण यह गिरावट दर्ज की गई है।
भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ माने जाने वाली संस्था, National Payments Corporation of India (NPCI) ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के अपने नतीजे जारी किए हैं। आंकड़ों के अनुसार, कंपनी की टॉप-लाइन ग्रोथ तो शानदार रही, लेकिन बॉटम-लाइन पर दबाव साफ देखा गया है। पिछले साल के ₹1,552 करोड़ के मुकाबले इस साल नेट सरप्लस 12% गिरकर ₹1,362 करोड़ पर आ गया है।
बढ़ते खर्चों की वजह क्या है?
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए तकनीक में निवेश करना अनिवार्य हो गया है। विशेष रूप से आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, सर्वर कैपेसिटी बढ़ाने और मार्केटिंग पर हुए भारी खर्च ने मुनाफे को प्रभावित किया है।
UPI का दबदबा और चुनौतियां
भारत के कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन का 89% हिस्सा अकेले UPI संभालता है। वर्तमान में यह सिस्टम हर दिन 80 करोड़ ट्रांजेक्शन प्रोसेस कर रहा है और मंथली वॉल्यूम 24 अरब के पार है। इस विशाल नेटवर्क को सुरक्षित और सुचारू रखने के लिए NPCI को लगातार अपनी सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है, जो इसके मार्जिन पर असर डाल रही है।
इसके अलावा, NPCI अन्य बड़े नेटवर्क जैसे IMPS, NACH और RuPay का भी संचालन करती है। RuPay क्रेडिट कार्ड्स का बाजार में प्रभाव बढ़ रहा है, जो अब कुल क्रेडिट कार्ड ट्रांजेक्शन का 20% हिस्सा है। हालांकि, रिटेल पेमेंट्स के लिए UPI की लोकप्रियता ने डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को कम कर दिया है।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी?
NPCI एक अनलिस्टेड कंपनी है, लेकिन इसकी वित्तीय सेहत सीधे तौर पर लिस्टेड बैंक और फिनटेक कंपनियों से जुड़ी है। अगर नेटवर्क चलाने की लागत ऐसे ही बढ़ती रही, तो भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को दोबारा लाने पर चर्चा तेज हो सकती है। फिलहाल, बड़े ट्रांजेक्शंस पर 30 बेसिस पॉइंट्स के MDR लगाने का प्रस्ताव चर्चा में है, जो भविष्य में पूरे डिजिटल पेमेंट सेक्टर के रेवेन्यू मॉडल को पूरी तरह बदल सकता है।
