NPCI के CEO दिलीप असबे ने साफ कर दिया है कि UPI ट्रांजेक्शन का **90%** हिस्सा पहले की तरह फ्री बना रहेगा। मर्चेंट फीस का सारा बोझ अब **₹1,000 करोड़** से ज्यादा टर्नओवर वाली बड़ी कंपनियों पर होगा।
क्या है पूरा मामला?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव के दौरान NPCI के MD और CEO दिलीप असबे ने UPI ट्रांजेक्शन पर लगने वाली मर्चेंट फीस को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम यूजर्स के लिए UPI सेवाएं मुफ्त बनी रहेंगी और कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू का 90% हिस्सा किसी भी तरह के नए शुल्क के दायरे में नहीं आएगा।
बड़ी कंपनियों पर होगा भार (MDR का गणित)
इस नई रणनीति के तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का भार मुख्य रूप से बड़े कॉर्पोरेट घराने उठाएंगे। जिन कंपनियों का सालाना टर्नओवर ₹1,000 करोड़ से ज्यादा है, उनसे अनुमानित MDR कलेक्शन का लगभग 80% हिस्सा वसूला जाएगा। चूँकि ये बड़ी कंपनियां पहले से ही क्रेडिट कार्ड जैसे पेमेंट तरीकों पर फीस देती हैं, इसलिए उम्मीद है कि वे इसे अपने ऑपरेशनल कॉस्ट का हिस्सा मानेंगी और ग्राहकों पर इसका असर नहीं डालेंगी।
इनोवेशन फंड और इंफ्रास्ट्रक्चर
डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए NPCI एक बड़ा कदम उठा रही है। फीस से होने वाली कमाई का 5% हिस्सा एक 'इनोवेशन फंड' में डाला जाएगा। अगले 3 सालों में यह फंड ₹3,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इस राशि का इस्तेमाल छोटे मर्चेंट्स और स्टार्टअप्स को डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने में किया जाएगा, ताकि छोटे शहरों में भी UPI का दायरा बढ़ सके।
यह फैसला फिनटेक और बैंकिंग सेक्टर के निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि यह डिजिटल पेमेंट को अधिक सस्टेनेबल मॉडल बनाता है।
