NITI Aayog ने भारत में इंश्योरेंस पेनिट्रेशन को मौजूदा **3.7%** से बढ़ाकर **4.7%** करने का लक्ष्य रखा है। सरकार अब 'मिसिंग मिडिल' (Missing Middle) आबादी को कवर करने के लिए प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर काम करने पर जोर दे रही है।
'मिसिंग मिडिल' पर फोकस
Global Fintech Fest 2026 में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल टेक्नोलॉजी या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से ही बीमा की पहुंच नहीं बढ़ाई जा सकती। NITI Aayog के प्रोग्राम डायरेक्टर संजीत सिंह ने जोर दिया कि सरकारी योजनाओं और प्रीमियम प्राइवेट इंश्योरेंस के बीच की आबादी, जिसे 'मिसिंग मिडिल' कहा जा रहा है, उसे कवर करना सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार अब इस वर्ग को एक कमर्शियल अवसर के रूप में देखने के लिए प्राइवेट कंपनियों को प्रोत्साहित कर रही है।
सम अश्योर्ड (Sum Assured) की अहमियत
इंडस्ट्री के दिग्गज अब केवल पॉलिसी की संख्या नहीं, बल्कि क्वालिटी पर ध्यान देने की बात कर रहे हैं। PB Fintech के जॉइंट ग्रुप CEO सर्बवीर सिंह ने सुझाव दिया कि सफलता का पैमाना 'सम अश्योर्ड' होना चाहिए। वर्तमान में लाइफ इंश्योरेंस का इंडस्ट्री एवरेज सम अश्योर्ड महज ₹4 लाख है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है।
डीरेगुलेशन से आसान होगा रास्ता
NITI Aayog के सदस्य राजीव गौबा ने 'डीरेगुलेशन' (Deregulation) पर बड़ा बयान दिया है। सरकार उन तमाम लाइसेंस और अनुपालन के कठिन नियमों को कम करने की योजना बना रही है जो फिलहाल इंश्योरेंस कंपनियों की ग्रोथ में बाधा बने हुए हैं। नियमों के सरलीकरण से ऑपरेशनल कॉस्ट कम होगी, जिससे बीमा कंपनियां आम लोगों के लिए सस्ते प्रोडक्ट्स लॉन्च कर पाएंगी।
डेटा प्राइवेसी की चुनौती
विस्तार की राह में डेटा सुरक्षा एक बड़ी बाधा है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, 80% से ज्यादा उपभोक्ता अपनी प्राइवेसी को लेकर सतर्क हैं। SBI General Insurance के लीडरशिप का मानना है कि पर्सनलाइजेशन और डेटा प्रोटेक्शन के बीच तालमेल बिठाना ही भविष्य की सफलता की कुंजी है। निवेशकों को अब सरकारी रेगुलेशन में ढील और नए मास-मार्केट प्रोडक्ट्स के लॉन्च पर नजर रखनी चाहिए।
