NITI Aayog ने बैंकों से वेस्ट बंगाल में क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो (CDR) को बेहतर बनाने की अपील की है। 2023 में यह आंकड़ा मात्र **47.5%** था। थिंक टैंक का मानना है कि बैंकों को अब सिर्फ लोन देने तक सीमित न रहकर निवेश बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
आंकड़ों की हकीकत
NITI Aayog की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी भारत में क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो काफी सुस्त है। साल 2023 में वेस्ट बंगाल का यह आंकड़ा 47.5% पर रहा, जो दक्षिणी भारत के 93.6% और पश्चिमी भारत के 82.8% के मुकाबले काफी पीछे है। बैंक जो पैसा जमा के तौर पर लेते हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा वापस लोन के रूप में मार्केट में नहीं आ पा रहा है।
बैंकों की बदलती भूमिका
थिंक टैंक का सुझाव है कि बैंकों को 'पैसिव लेंडर' से बदलकर 'एक्टिव फैसिलिटेटर' बनना होगा। इसका मतलब है कि बैंक केवल लोन न दें, बल्कि स्थानीय उद्यमियों और निवेशकों के बीच एक पुल (Matchmaker) का काम करें। इससे राज्य में बैंक-फ्रेंडली प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ेगी और लोन की डिमांड में इजाफा होगा।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों के लिए यह बड़ी खबर है क्योंकि बैंकों की प्रॉफिटेबिलिटी का मुख्य आधार लोन ग्रोथ ही होती है। वेस्ट बंगाल में अगर लोन का दायरा बढ़ता है, तो बैंकों की ब्याज से होने वाली कमाई (Interest Income) में सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य में कितने बैंक-एबल प्रोजेक्ट्स तैयार होते हैं और एसेट क्वालिटी कैसी रहती है।
MSME सेक्टर पर दांव
NITI Aayog ने विशेष रूप से MSME सेक्टर के लिए स्ट्रक्चर्ड क्रेडिट फैसिलिटीज पर जोर दिया है। यदि छोटे कारोबार बड़े और प्रतिस्पर्धी संस्थानों में बदलते हैं, तो इससे पूरे राज्य की इकोनॉमी में 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' देखने को मिल सकता है। अब देखना यह होगा कि बैंक अपनी ऑपरेशनल स्ट्रैटेजी में क्या बदलाव करते हैं और भविष्य में MSME लोन पोर्टफोलियो का परफॉर्मेंस कैसा रहता है।
