Essel Group के चेयरमैन Subhash Chandra के पर्सनल इनसॉल्वेंसी मामले में NCLT ने एक बड़ी पहल की है। ₹22,006 करोड़ के कर्ज को लेकर चल रहे विवाद और **99.97%** हेयरकट (Haircut) के विवादास्पद प्रस्ताव के बीच अब **5** सदस्यों की एक स्पेशल बेंच मामले की सुनवाई करेगी।
डेडलॉक और नई बेंच का गठन
Subhash Chandra से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी लड़ाई एक नए मोड़ पर आ गई है। ट्रिब्यूनल की पुरानी दो-सदस्यीय बेंच इस मामले पर कोई ठोस फैसला नहीं ले सकी थी। किसी भी आम सहमति पर न पहुंचने के कारण NCLT प्रेसिडेंट ने अब 5 सदस्यों की एक विशेष बेंच का गठन किया है, जो 1 सितंबर, 2026 से इस मामले को फिर से सुनेगी।
विवाद की जड़: ₹22,006 करोड़ का कर्ज
मामले का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वह रीपेमेंट प्लान है, जिसमें ₹22,006 करोड़ के कुल दावों के बदले महज ₹6.5 करोड़ चुकाने की बात कही गई है। इसे वित्तीय भाषा में 99.97% का 'हेयरकट' माना जा रहा है, यानी लेंडर्स को अपना लगभग पूरा पैसा डूबता हुआ दिख रहा है। Subhash Chandra का कहना है कि यह पर्सनल कर्ज नहीं, बल्कि Essel और Zee से जुड़ी कंपनियों के लिए पर्सनल गारंटी है।
बैंकों का कड़ा विरोध
इस प्रस्ताव को लेकर LIC Housing Finance और HDFC Bank जैसे बड़े लेंडर्स ने कड़ा ऐतराज जताया है। उनका मानना है कि यह प्लान न तो उचित है और न ही व्यवहार्य। विवाद इतना गहरा गया है कि मामले को NCLAT (National Company Law Appellate Tribunal) तक ले जाया गया है।
यह मामला IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) के तहत प्रमोटर्स की पर्सनल गारंटी पर एक बड़ा टेस्ट केस बन चुका है। अगर इस स्तर का हेयरकट मंजूर होता है, तो यह भविष्य के बैंकिंग रिकवरी मामलों के लिए एक नई और चिंताजनक मिसाल कायम कर सकता है।
