National Company Law Tribunal (NCLT) ने Jet Airways के लिक्विडेटर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें Boeing से **₹500 करोड़** की रिकवरी की मांग की गई थी। ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया कि यह मामला इनसॉल्वेंसी प्रोसेस के दायरे से बाहर है और इसके लिए सिविल ट्रायल की जरूरत है।
विवाद की जड़ क्या है?
यह मामला साल 2013 का है, जब Jet Airways ने दो एयरक्राफ्ट्स की डिलीवरी के लिए Boeing को करीब 92.13 मिलियन डॉलर का एडवांस पेमेंट दिया था। एयरलाइन के फाइनेंशियल संकट में आने के बाद 2019 में Boeing ने एग्रीमेंट्स सस्पेंड कर दिए थे। कंपनी का तर्क था कि यह पैसा पहले ही उनके क्लेम के बदले एडजस्ट हो चुका है।
NCLT का फैसला क्यों आया?
प्रभात कुमार और सुशील महादेवराव कोचे की बेंच ने साफ कहा कि Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत यह मामला हल नहीं हो सकता। ट्रिब्यूनल का कहना है कि सेक्शन 60(5) के तहत उनके पास सीमित अधिकार हैं, और इस तरह के जटिल कॉन्ट्रैक्ट विवादों के लिए सिविल कोर्ट में फुल-फ्लेज्ड ट्रायल जरूरी है।
क्रेडिटर्स पर क्या असर पड़ेगा?
यह फैसला क्रेडिटर्स के लिए एक बड़ा सेटबैक माना जा रहा है। चूंकि Jet Airways फिलहाल लिक्विडेशन की प्रक्रिया में है, इसलिए ₹500 करोड़ की यह राशि कंपनी के एसेट पूल में शामिल नहीं हो पाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में एयरलाइन के लिक्विडेशन का आदेश दिया था, और अब इस पैसे को हासिल करने के लिए लिक्विडेटर को अलग से कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है, जिसमें लंबा समय और भारी खर्च होने की संभावना है।
