NCLT की मुंबई बेंच ने Videocon Industries के पूर्व प्रमोटर Venugopal Dhoot को आधिकारिक तौर पर दिवालिया घोषित कर दिया है। State Bank of India की याचिका पर यह फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने Dhoot की निजी संपत्ति को बेचकर **₹12,668 करोड़** की रिकवरी का आदेश दिया है।
कानूनी शिकंजा और पूरी खबर
मुंबई स्थित National Company Law Tribunal (NCLT) ने 5 नवंबर, 2026 को Venugopal Dhoot के खिलाफ यह बड़ा फैसला सुनाया है। यह मामला State Bank of India (SBI) की ओर से दायर की गई लंबी कानूनी लड़ाई का नतीजा है। दरअसल, Dhoot ने Videocon Industries और उसकी सब्सिडियरी कंपनियों के लिए जो पर्सनल गारंटी दी थी, उसे पूरा करने में वे विफल रहे।
30 सितंबर, 2026 तक कुल देनदारी ₹12,668.06 करोड़ आंकी गई है। इसमें लोन और वर्किंग कैपिटल फैसिलिटीज शामिल हैं, जो 2017 में कई बैंकों के SBI में विलय के बाद एक साथ जुड़ी थीं।
क्यों खारिज हुआ सेटलमेंट प्लान?
कोर्ट के आदेश से पहले, Dhoot ने दिवालिया होने से बचने के लिए जून 2026 में एक रीपेमेंट प्लान पेश किया था। इसमें सिलीगुड़ी के एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के जरिए ₹600 करोड़ चुकाने का वादा किया गया था। हालांकि, कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स और रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने इस ऑफर को नामंजूर कर दिया, क्योंकि यह भविष्य की अनिश्चितताओं और कैश फ्लो पर आधारित था।
आगे क्या होगा?
NCLT ने Asish Narayan को बैंकruptcy ट्रस्टी नियुक्त किया है। अब उन्हें Dhoot की निजी संपत्ति की पहचान करके उसकी लिक्विडेशन प्रक्रिया शुरू करनी होगी। Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत, Dhoot को 7 दिनों के भीतर अपनी फाइनेंशियल स्थिति का पूरा ब्योरा देना होगा, और ट्रस्टी को 90 दिनों में रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इस फैसले के बाद, Dhoot अब किसी भी कंपनी के डायरेक्टर के तौर पर काम नहीं कर पाएंगे और न ही अपने फाइनेंशियल मामलों का प्रबंधन कर सकेंगे।
