NCLAT ने सबाश चंद्रा (Subhash Chandra) के पर्सनल इंसॉल्वेंसी प्लान के खिलाफ लेनदारों की अर्जी पर सुनवाई करने का फैसला किया है। इस प्लान में **₹22,006 करोड़** के क्लेम के बदले सिर्फ **₹6.5 करोड़** देने की बात थी, जिसके बाद Zee Entertainment के शेयर में **14.3%** की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
क्या है पूरा मामला?
नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुबाश चंद्रा के उस विवादित रीपेमेंट प्लान को रिव्यू करने का फैसला किया है, जिसे पहले NCLT ने हरी झंडी दी थी। लेनदारों का कहना है कि कुल ₹22,006.57 करोड़ के क्लेम के बदले ₹6.5 करोड़ का सेटलमेंट बेहद कम है।
बैंकों का कड़ा विरोध
HDFC Bank और LIC Housing Finance जैसे बड़े लेनदारों ने इस प्लान का पुरजोर विरोध किया है। उनका आरोप है कि इस सेटलमेंट प्रक्रिया में वोटिंग को सुबाश चंद्रा से जुड़ी कंपनियों द्वारा प्रभावित किया गया था। बाजार में इस खबर के आते ही Zee Entertainment के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली हुई और स्टॉक 14.3% तक लुढ़क गया।
सुबाश चंद्रा का पक्ष
अपने बचाव में सुबाश चंद्रा का कहना है कि वे केवल एक पर्सनल गारंटर हैं, न कि मुख्य उधारकर्ता। उन्होंने दावा किया है कि एस्सेल ग्रुप ने पहले ही कुल कर्ज का एक बड़ा हिस्सा यानी ₹43,000 करोड़ चुका दिया है और अब सिर्फ ₹2,000 करोड़ के आसपास की देनदारी बाकी है।
निवेशकों पर असर
यह केस इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के भविष्य के लिए भी काफी अहम माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि 0.03% रिकवरी के इस तरह के सेटलमेंट को मंजूरी मिलती है, तो यह क्रेडिटर राइट्स के लिए एक नकारात्मक मिसाल बन सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर NCLAT की अगली सुनवाई पर टिकी है, क्योंकि इससे कंपनी की लीडरशिप और मार्केट सेंटिमेंट पर बड़ा असर पड़ सकता है।
