Jet Airways कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! NCLAT का बड़ा फैसला, PF और ग्रेच्युटी का पूरा पैसा मिलेगा

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Jet Airways कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! NCLAT का बड़ा फैसला, PF और ग्रेच्युटी का पूरा पैसा मिलेगा

जेट एयरवेज (Jet Airways) के पूर्व कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड (PF), पेंशन और ग्रेच्युटी (Gratuity) का पूरा भुगतान किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि यह पैसा लेंडर्स (Lenders) के दावों से पहले दिया जाएगा।

क्या हुआ है?

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने बंद हो चुकी जेट एयरवेज के पूर्व कर्मचारियों के बकाए को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि कर्मचारियों के सभी प्रोविडेंट फंड (PF), पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान पूरी तरह से किया जाना चाहिए।

सबसे खास बात यह है कि ट्रिब्यूनल ने कहा कि ये कर्मचारी भुगतान कंपनी की सामान्य लिक्विडेशन (Liquidation) संपत्ति का हिस्सा नहीं हैं। इसका मतलब है कि इनका भुगतान बैंकों और वित्तीय संस्थानों जैसे अन्य लेनदारों के दावों से पहले किया जाना चाहिए। NCLAT ने यह भी आदेश दिया कि एयरलाइन की इन्सॉल्वेंसी (Insolvency) समाधान प्रक्रिया के दौरान चले कानूनी मामलों के 1,656 दिनों को कर्मचारियों की सेवा अवधि की गणना से बाहर रखा जाएगा, जब लिक्विडेशन की तारीख से 24 महीने की अवधि गिनी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अदालती मामलों में लगे समय के कारण कर्मचारियों का बकाया अनुचित रूप से कम न हो।

लेनदारों (Lenders) के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

इस फैसले का सीधा असर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जैसे प्रमुख बैंकों सहित लेनदारों की रिकवरी (Recovery) प्रक्रिया पर पड़ता है। इन बैंकों ने यह तर्क दिया था कि चूंकि जेट एयरवेज के पास PF और ग्रेच्युटी के लिए कोई अलग फंड नहीं था, इसलिए इन भुगतानों को अन्य ऋणों की तरह ही सामान्य लिक्विडेशन प्रक्रिया के तहत निपटाया जाना चाहिए।

NCLAT ने इस दलील को खारिज कर दिया। चेयरपर्सन जस्टिस अशोक भूषण और टेक्निकल मेंबर बरुन मित्रा की बेंच ने स्पष्ट किया कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) "ड्यू-सेंट्रिक" (Due-centric) यानी हकदारी-केंद्रित है। इसका मतलब है कि कानूनी फोकस कर्मचारियों के हक पर है, न कि लिक्विडेशन के समय बैंक खाते में उपलब्ध वास्तविक संपत्ति पर। नतीजतन, अलग फंड की कमी कर्मचारियों को उनके सही बकाए का दावा करने से नहीं रोक सकती।

मौजूदा स्थिति को समझना

निवेशकों और बाजार पर नजर रखने वालों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि जेट एयरवेज एक औपचारिक लिक्विडेशन प्रक्रिया से गुजर रही है। एयरलाइन ने कई साल पहले अपना संचालन बंद कर दिया था, और इसके शेयर स्टॉक एक्सचेंजों पर लंबे समय से निलंबित हैं। यह फैसला इन्सॉल्वेंसी मामले के भीतर एक प्रक्रियात्मक विकास है और कंपनी के व्यावसायिक संचालन के फिर से शुरू होने का संकेत नहीं देता है।

कानूनी मिसाल

यह फैसला जेट एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर्स वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े 2022 के NCLAT फैसले सहित पिछले कानूनी फैसलों के अनुरूप है। ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के सुनील कुमार जैन बनाम सुंदरेश भट्ट मामले में दिए गए रुख का भी जिक्र किया। कोर्ट ने लगातार यह बनाए रखा है कि PF, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे कर्मचारियों के हक को सुरक्षित रखा जाना चाहिए और इसे अन्य लेनदारों को वितरित की जाने वाली संपत्ति के सामान्य पूल से अलग रखा जाना चाहिए।

आगे क्या देखना है?

अगला कदम अदालत द्वारा नियुक्त लिक्विडेटर (Liquidator) द्वारा 1,656 दिनों के मुकदमेबाजी अवधि को छोड़कर, कर्मचारियों के बकाए की फिर से गणना करना होगा। इसके बाद लिक्विडेटर को NCLAT के निर्देशों के आधार पर इन भुगतानों को प्रोसेस करना होगा। मुख्य बात यह है कि इस पुनर्गणना का अन्य लेनदारों के लिए उपलब्ध फंड की कुल राशि पर क्या प्रभाव पड़ता है, जो लिक्विडेशन कार्यवाही के हिस्से के रूप में अपनी रिकवरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.