National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने अनिल धीरूभाई अंबानी वेंचर्स की याचिका को खारिज कर दिया है। रिलायंस कैपिटल का मालिकाना हक मिलने के बाद अब हिंदुजा ग्रुप की कंपनी ने री-ब्रांडिंग पूरी कर ली है, जिससे कानूनी विवाद का अंत हो गया है।
NCLAT ने अनिल धीरूभाई अंबानी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (ADAVL) की ओर से दायर उस अपील को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है, जिसमें रिलायंस ब्रांड के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई थी। यह विवाद तब सुलझा जब IndusInd International Holdings Ltd (IIHL) ने पुष्टि की कि उन्होंने पुरानी Reliance Capital का नाम बदलकर अब अपनी नई पहचान तय कर ली है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला नवंबर 2021 में शुरू हुआ था, जब Reserve Bank of India (RBI) ने बड़े स्तर पर भुगतान डिफॉल्ट और गवर्नेंस फेल्योर के बाद रिलायंस कैपिटल को अपने प्रशासन में ले लिया था। इसके बाद लंबी प्रक्रिया चली और अप्रैल 2023 में हिंदुजा ग्रुप की IIHL को सफल बोलीदाता घोषित किया गया।
डील और सेटलमेंट
यह अधिग्रहण ₹9,650 करोड़ के रेजोल्यूशन प्लान के तहत पूरा किया गया। नए मैनेजमेंट ने पुराने प्रमोटर ग्रुप से खुद को अलग करने के लिए नाम बदलने का बड़ा कदम उठाया। IIHL ने 11 सितंबर, 2026 को ट्रिब्यूनल में हलफनामा दायर कर यह कन्फर्म किया कि नाम बदलकर 'IndusInd' कर दिया गया है, जिसके बाद कोर्ट ने केस को बंद कर दिया।
आगे का रास्ता
इस कानूनी अड़चन के दूर होने से फाइनेंशियल सेक्टर में छाई अनिश्चितता खत्म हो गई है। IIHL ने Reliance General Insurance Company Ltd में भी अतिरिक्त ₹200 करोड़ का फंड डाला है ताकि कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति मजबूत हो सके। अब नया मैनेजमेंट बिना किसी कानूनी विवाद के अपनी भविष्य की ग्रोथ और स्ट्रैटेजी पर पूरा ध्यान केंद्रित कर पाएगा।
