देश की दिग्गज NBFCs अब अनसिक्योर्ड क्रेडिट से हटकर गोल्ड लोन की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं। इनका संयुक्त पोर्टफोलियो दोगुना होकर **₹1 लाख करोड़** तक पहुंच गया है, लेकिन एनालिस्ट्स ने कर्जदारों के ओवर-लीवरेज होने और डेट सैचुरेशन को लेकर चेतावनी दी है।
भारत की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) ने अपनी लेंडिंग स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव किया है। पर्सनल लोन में बढ़ते डिफॉल्ट्स के बीच, अब ये कंपनियां अनसिक्योर्ड लोन से किनारा कर गोल्ड-बैकड लोन पर अपना फोकस बढ़ा रही हैं। सितंबर 2026 की तिमाही तक, चार प्रमुख लेंडर्स—Bajaj Finance, IIFL Finance, L&T Finance और HDB Financial Services—का संयुक्त गोल्ड लोन बुक बढ़कर लगभग ₹1 लाख करोड़ हो गया है, जो एक साल पहले केवल ₹48,831 करोड़ था।
इस दौड़ में IIFL Finance सबसे आगे है, जिसका गोल्ड लोन पोर्टफोलियो बढ़कर ₹65,729 करोड़ हो गया है, जो कंपनी के कुल लोन एसेट्स का 53% से अधिक है। वहीं, Bajaj Finance ने भी इस सेगमेंट में जबरदस्त रफ्तार दिखाई है, जहां साल-दर-साल 105% की ग्रोथ के साथ पोर्टफोलियो ₹24,195 करोड़ तक पहुंच गया है। अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए L&T Finance जैसे खिलाड़ी छोटे शहरों और कस्बों में अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं और साल के अंत तक 800 ब्रांचों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।
बढ़ता जोखिम और कर्जदारों की क्वालिटी
गोल्ड लोन सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन इतनी तेजी से हो रही ग्रोथ ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। Piramal Finance के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में बांटे गए गोल्ड लोन में से 15% से 23% ऐसे लोगों को दिए गए, जो पहले से ही दूसरे लोन चुकाने में संघर्ष कर रहे हैं। यह 'डेट ट्रैप' का एक बड़ा खतरा पैदा करता है। यदि सोने की कीमतें तेजी से गिरती हैं, तो लेंडर्स के लिए वसूली की प्रक्रिया काफी जटिल हो सकती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों के लिए इस बदलाव की सफलता दो प्रमुख चीजों पर निर्भर करेगी: पहला, सोने की कीमतों में स्थिरता और दूसरा, लेंडर्स की क्रेडिट अनुशासन। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे लोन देने से पहले कर्जदारों की बैकग्राउंड जांच को सख्त रखें। आने वाले समय में कंपनी अपडेट्स पर नजर रखना जरूरी होगा कि वे खराब लोन (Bad Loans) को कैसे मैनेज करती हैं और अपने लेंडिंग स्टैंडर्ड्स को कितना सुरक्षित रखती हैं।
