देश की छोटी NBFCs इन दिनों AI-आधारित साइबर हमलों की चपेट में हैं। पिछले दो महीनों में इन कंपनियों को **₹300 करोड़** से ज्यादा का भारी नुकसान हुआ है। CyberStrike और ARTEX जैसे घातक टूल्स के इस्तेमाल ने सुरक्षा तंत्र की कमियों को उजागर कर दिया है।
बड़े संकट में छोटी NBFCs
भारतीय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए साइबर सुरक्षा एक बड़ा सिरदर्द बन गई है। पिछले दो महीनों में 150 से ज्यादा FIR दर्ज की गई हैं, जो इस बात का सबूत हैं कि अपराधी कितनी तेजी से सक्रिय हैं। ये हैकर्स अब पुराने तरीकों के बजाय अत्याधुनिक AI टूलकिट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो डिजिटल सुरक्षा की हर दीवार को चुटकियों में भेद रहे हैं।
कैसे काम कर रहे हैं ये टूल्स?
विशेषज्ञों के मुताबिक, CyberStrike और ARTEX जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करके हैकर्स नेटवर्क की कमियों को ढूंढ रहे हैं। ये AI सिस्टम इतने तेज हैं कि फिशिंग और इंटरफेस क्लोनिंग जैसे काम चंद घंटों में पूरे कर लिए जाते हैं। जिन कंपनियों का टर्नओवर ₹1,000 करोड़ से कम है, उनकी डिजिटल सुरक्षा अक्सर पुरानी पड़ चुकी है, जिसका सीधा फायदा ये हैकर्स उठा रहे हैं।
RBI और CERT-In की सख्त चेतावनी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पहले ही अपनी गाइडलाइंस में स्पष्ट कर दिया है कि फाइनेंशियल संस्थानों को अपने डिजिटल रिस्क पर पैनी नजर रखनी होगी। अब CERT-In ने भी सभी कंपनियों को आगाह किया है कि वे अपनी 'रेड टीम्स' (Red Teams) को सक्रिय करें और सुरक्षा ऑडिट तेज करें।
निवेशकों के लिए सबक
निवेशकों को अब कंपनियों के क्वार्टरली नतीजों पर बारीक नजर रखनी होगी। साइबर हमले के कारण कंपनियों को न केवल सीधे पैसे का नुकसान हो रहा है, बल्कि साइबर इंश्योरेंस का खर्च भी बढ़ रहा है। भविष्य में उन कंपनियों पर ज्यादा दबाव दिखेगा जो अपनी IT सुरक्षा और साइबर डिफेंस पर खर्च नहीं बढ़ा पाएंगी, क्योंकि इसका सीधा असर उनके नेट प्रॉफिट और मार्जिन पर पड़ेगा।
