कॉरपोरेट डेट मार्केट (corporate debt market) में चल रहे अनुकूल माहौल का लाभ उठाते हुए, टॉप-रेटेड NBFCs ने फंड जुटाने की अपनी कवायद तेज कर दी है। पिछले महीने यानी अप्रैल में प्राइमरी डेट मार्केट में थोड़ी खामोशी के बाद, अब कई बड़ी कंपनियां बॉन्ड बेचकर अच्छी-खासी रकम जुटाने की फिराक में हैं।
खासतौर पर, पांच प्रमुख AAA-रेटेड NBFCs अगले दो से पांच साल की मैच्योरिटी वाले बॉन्ड के जरिए कुल ₹15,000 करोड़ का फंड जुटाने की तैयारी में हैं। यह दिखाती है कि कंपनियां मौजूदा ब्याज दरों पर अपने उधार को लॉक करने की रणनीति अपना रही हैं।
इस लिस्ट में Bajaj Finance सबसे आगे है, जो दो अलग-अलग इश्यू से ₹9,000 करोड़ जुटाना चाहती है। वहीं, Tata Capital ₹1,770 करोड़, Bajaj Housing Finance ₹1,500 करोड़, M&M Financial Services ₹1,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही हैं। हाल ही में Poonawalla Fincorp ने भी ₹1,000 करोड़ के लिए बोलियां बंद की हैं।
कॉर्पोरेट बॉन्ड यील्ड्स में यह गिरावट कई वजहों से है। खास तौर पर, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कम होने की उम्मीदों और क्रूड ऑयल (crude oil) की कीमतों में आई नरमी ने बॉन्ड यील्ड्स को करीब 15 बेसिस पॉइंट तक नीचे ला दिया है। बैंकर और एक्सपर्ट्स कंपनियों को सलाह दे रहे हैं कि वे इस मौके का फायदा उठाकर आज की दरों पर पैसा उधार ले लें, ताकि भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव से बचा जा सके।
NBFCs का मानना है कि बॉन्ड फंडिंग, बैंक लोन की तुलना में ज्यादा लचीली होती है। इसमें मैच्योरिटी चुनने, देनदारियों (liabilities) का बेहतर मिलान करने और ब्याज दरों को जल्दी एडजस्ट करने जैसे फायदे मिलते हैं।
हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की कोशिश से बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे आने वाले इश्यूज के लिए यील्ड्स बढ़ सकती हैं। अगर भविष्य में भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tension) बढ़ता है या महंगाई फिर से सिर उठाती है, तो आज लिया गया उधार भविष्य में महंगा साबित हो सकता है।
