बड़े NBFCs जैसे Tata Capital, Godrej Capital और Aditya Birla Capital अपने गोल्ड लोन बिजनेस को बढ़ा रहे हैं। RBI के नए सख्त नियमों (अप्रैल 2026 से लागू) के बावजूद, ये कंपनियां सुरक्षित कर्ज (Secured Lending) पर फोकस कर रही हैं, जिससे बाजार में कंसॉलिडेशन (Consolidation) का रास्ता साफ हो सकता है।
गोल्ड लोन में NBFCs की दमदार एंट्री!
भारतीय गोल्ड लोन सेक्टर में एक नई लहर देखने को मिल रही है। बड़े नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFCs) अपने सुरक्षित कर्ज (Secured Lending) वाले पोर्टफोलियो को मजबूत कर रहे हैं। बड़ी और विविध फाइनेंशियल ग्रुप्स का यह कदम गोल्ड-बैक्ड क्रेडिट के प्रति उनकी प्राथमिकता को दर्शाता है, जिसे आमतौर पर अनसिक्योर्ड रिटेल लोन की तुलना में कम जोखिम भरा माना जाता है।
Aditya Birla Capital ने मार्च 2027 तक गोल्ड लोन के लिए 200 से 300 नई शाखाएं खोलने की योजना बनाई है। वहीं, एक्विजिशन (Acquisition) के जरिए भी बिजनेस बढ़ाया जा रहा है। जुलाई 2026 में Tata Capital ने केरल स्थित Yogakshemam Loans (Yogloans) में 88.6% हिस्सेदारी खरीदी, जबकि Godrej Capital ने Kanakadurga Finance के गोल्ड लोन बिजनेस को अपने नाम कर लिया।
RBI के सख्त नियम क्या हैं?
यह सब तब हो रहा है जब रेगुलेटरी माहौल काफी सख्त हो गया है। 1 अप्रैल, 2026 को RBI ने गोल्ड लोन के लिए एक एकीकृत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (Regulatory Framework) पेश किया है। इसके तहत बैंकों और NBFCs के लिए मानकीकृत (Standardized) प्रैक्टिस अनिवार्य हैं, जिसमें टियर्ड लोन-टू-वैल्यू (LTV) स्ट्रक्चर भी शामिल है। नए नियमों के मुताबिक, छोटे लोन (₹2.5 लाख तक) के लिए 85% LTV, ₹2.5 लाख से ₹5 लाख के लोन के लिए 80% LTV, और बड़े लोन के लिए 75% LTV की पेशकश की जा सकती है। इन कदमों का मकसद पारदर्शिता और कर्जदार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन इनसे सभी कर्जदाताओं के लिए कंप्लायंस (Compliance) की जरूरतें भी बढ़ गई हैं।
बाजार में ग्रोथ और कंसॉलिडेशन की उम्मीद
इस सेक्टर में जबरदस्त ग्रोथ देखी गई है, मई 2026 तक भारत में गोल्ड ज्वैलरी के अगेंस्ट आउटस्टैंडिंग लोन ₹3.3 लाख करोड़ को पार कर गया था। बड़े, डाइवर्सिफाइड NBFCs के लिए मौजूदा मार्केट डायनामिक्स (Market Dynamics) मार्केट शेयर कैप्चर करने का एक बड़ा मौका पेश कर रहे हैं। इन कंपनियों के पास अक्सर पर्याप्त पूंजी और इंफ्रास्ट्रक्चर होता है, जिससे वे नए रेगुलेटरी कंप्लायंस और ऑपरेशनल खर्चों को आसानी से वहन कर सकते हैं।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बदलाव से बाजार में कंसॉलिडेशन (Consolidation) बढ़ सकता है। छोटे, क्षेत्रीय गोल्ड लोन प्लेयर्स, खासकर दक्षिणी भारत में केंद्रित, नए और कड़े रेगुलेटरी नियमों के तहत मार्जिन बनाए रखने में संघर्ष कर सकते हैं। यह दबाव बड़ी कंपनियों के लिए तेजी से अपनी ब्रांच नेटवर्क का विस्तार करने के लिए अधिग्रहण के अवसर पैदा कर सकता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को इन कंपनियों द्वारा विस्तार के दौरान जोखिमों के प्रबंधन पर ध्यान देना होगा। गोल्ड लोन सुरक्षित होने के बावजूद, यह सेक्टर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है, जो कोलैटरल (Collateral) के मूल्य को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, इन नई पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कर्जदाता RBI के नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार सख्त एसेट क्वालिटी (Asset Quality), गोल्ड एसेट्स के लिए सुरक्षित स्टोरेज और कुशल लोन मूल्यांकन प्रक्रियाओं को बनाए रखने में कितने सक्षम हैं। जैसे-जैसे यह सेक्टर नए फ्रेमवर्क के तहत परिपक्व हो रहा है, ग्रोथ, कंप्लायंस लागत और एसेट क्वालिटी के बीच संतुलन बाजार सहभागियों के लिए मुख्य फोकस बना रहेगा।
