जुलाई 2026 में NBFC कंपनियों के गोल्ड-बैक्ड लोन पोर्टफोलियो में **68.5%** की जबरदस्त तेजी देखी गई है, जो कुल **₹3.54 ट्रिलियन** तक पहुंच गया है। साथ ही, कंज्यूमर ड्यूरेबल फाइनेंसिंग में **51.5%** का उछाल यह बताता है कि अब उधार लेने वाले लोग लंबी अवधि के बजाय तात्कालिक उपभोग (consumption) पर ध्यान दे रहे हैं।
जुलाई 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो NBFCs अब गोल्ड-बैक्ड क्रेडिट को अपना मुख्य हथियार बना रहे हैं। इस सेगमेंट में 68.5% की आक्रामक बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद कुल पोर्टफोलियो ₹3.54 ट्रिलियन के स्तर को छू गया है। रिटेल क्रेडिट की ओवरऑल ग्रोथ 21.4% रही, जिसने संस्थानों की 14.9% की औसत क्रेडिट ग्रोथ रेट को काफी पीछे छोड़ दिया है।
उपभोग (Consumption) में बदलाव का असर
आम आदमी अब लोन का पैसा प्रॉपर्टी या गाड़ियों में निवेश करने के बजाय होम एप्लायंसेज और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर खर्च कर रहा है। इसी कारण कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में 51.5% का उछाल देखा गया है। इसके विपरीत, हाउसिंग और व्हीकल लोन की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
गोल्ड लोन सुरक्षित (Secured) होते हैं क्योंकि इनके पीछे फिजिकल कोलैटरल होता है। सोने की बढ़ती कीमतों ने लेंडर्स को एक 'सेफ्टी बफर' दिया है, जिससे वे अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन के खतरों से बच रहे हैं। हालांकि, इस मार्केट में भीड़ बढ़ने से प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। यदि लेंडर्स मार्केट शेयर हथियाने के लिए ब्याज दरें घटाते हैं, तो उनके नेट प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आना तय है।
इसके अलावा, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर की धीमी ग्रोथ यह दर्शाती है कि कंपनियां अब कॉर्पोरेट रिस्क से बचकर रिटेल एक्सपोजर बढ़ा रही हैं। अगर भविष्य में महंगाई बढ़ती है या कंज्यूमर सेंटीमेंट गिरता है, तो रिटेल लोन की यह निर्भरता कंपनियों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। निवेशकों को आने वाले समय में NPAs की स्थिति और गोल्ड-टू-लोन रेशियो (LTV) पर कड़ी नजर रखनी होगी।
