NBFCs के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में भारी तनाव देखने को मिल रहा है। Shriram Finance और Bajaj Finance के स्टेज-2 एसेट्स (Stage 2 Assets) में हुई बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जबकि कंपनियां आक्रामक तरीके से नई शाखाएं खोलने में जुटी हैं।
गोल्ड लोन को अक्सर एक सुरक्षित निवेश माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के हालिया डेटा बताते हैं कि कर्जदार अपनी ईएमआई (EMI) चुकाने में संघर्ष कर रहे हैं। नतीजतन, 'स्टेज-2 एसेट्स'—यानी वे लोन जिनमें भुगतान में देरी हो रही है—में तेजी देखी गई है।
प्रमुख खिलाड़ियों का हाल
Shriram Finance ने ग्रॉस स्टेज-2 लोन में 71.1% का बड़ा उछाल दर्ज किया है, जिसमें गोल्ड लोन का बड़ा योगदान है। वहीं, Bajaj Finance के स्टेज-2 गोल्ड एसेट्स बढ़कर 4.51% पर पहुंच गए हैं, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा महज 0.65% था। यह बढ़ते डिफॉल्ट इस बात का सबूत हैं कि कर्जदारों की आर्थिक सेहत बिगड़ रही है।
क्यों बढ़ रहा है रिस्क?
Piramal Finance के अनुमानों के अनुसार, गोल्ड लोन लेने वाले 15% से 23% लोग ऐसे हैं जो पहले से ही किसी अन्य कर्ज को 90 दिनों से अधिक समय से नहीं चुका पा रहे हैं। साफ है कि लोग अपनी लिक्विडिटी की समस्याओं को सुलझाने के लिए गोल्ड लोन का सहारा ले रहे हैं, जो लेंडर्स के लिए रिस्क का बड़ा कारण है।
क्या है लेंडर्स की रणनीति?
रिस्क को मैनेज करने के लिए कंपनियां अब 'ईएमआई' (EMI) स्ट्रक्चर से हटकर 'बुलेट रिपेमेंट' (Bullet Repayment) की ओर शिफ्ट हो रही हैं। इसमें कर्जदार को लोन की अवधि के अंत में एक साथ मूलधन और ब्याज चुकाना होता है। हालांकि, कंपनियां रिस्क के बावजूद रुक नहीं रही हैं। Bajaj Finance ने दूसरी तिमाही में 321 नई शाखाएं खोली हैं और 2027 तक 2,800 गोल्ड-लोन शाखाओं का लक्ष्य रखा है। वहीं, Piramal Finance भी इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक 200 नई शाखाएं खोलने की तैयारी में है।
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनियां बढ़ते कर्ज और आक्रामक विस्तार के बीच बैलेंस कैसे बनाती हैं। आने वाली तिमाहियों में स्टेज-2 और स्टेज-3 एसेट्स की चाल पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
