भारतीय NBFC-फिनटेक पोर्टफोलियो जून 2026 तक सालाना 21.2% बढ़ा है। लेंडर्स छोटे पर्सनल लोन से हटकर ₹1 लाख से ₹5 लाख के बड़े बिज़नेस क्रेडिट की ओर बढ़ रहे हैं। यह रणनीति बेहतर क्वालिटी वाले कर्जदार पकड़ने की ओर इशारा करती है, हालांकि निवेशकों को अनसिक्योर्ड लेंडिंग के बढ़ते जोखिम पर भी नज़र रखनी चाहिए।
NBFC-फिनटेक का बढ़ता लोन पोर्टफोलियो: जानिए क्या है खास?
भारतीय नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) फिनटेक सेक्टर ने जून 2026 तक अपने लोन पोर्टफोलियो में सालाना 21.2% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है। इंडस्ट्री की लेटेस्ट रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सेक्टर अब आक्रामक विस्तार के बजाय सोच-समझकर ग्रोथ करने और स्ट्रैटेजिक लेंडिंग पर ज्यादा फोकस कर रहा है।
छोटे कर्ज़ से बड़े बिज़नेस लोन की ओर बदलाव
इस ग्रोथ के पीछे एक बड़ा कारण फिनटेक लेंडर्स की प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी में आया बदलाव है। फिनटेक लेंडर्स, जो अब कुल NBFC पोर्टफोलियो का लगभग 9% हिस्सा हैं, छोटे-छोटे पर्सनल लोन के बजाय बड़े अनसिक्योर्ड बिज़नेस लोन की ओर बढ़ रहे हैं। खास तौर पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक के लोन में बढ़ोतरी देखी गई है। यह बदलाव ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने और बेहतर क्रेडिट हिस्ट्री वाले कर्जदारों को आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
इन्वेस्टर्स के नज़रिए से, यह बड़ा कदम काफी महत्वपूर्ण है। बड़े लोन देने के लिए कर्जदार की रिपेमेंट क्षमता को परखने के लिए ज़्यादा गहन जांच की ज़रूरत होती है। आंकड़े बताते हैं कि लेंडर्स अब ज़्यादा सेलेक्टिव हो रहे हैं। जून 2026 में पहली बार लोन लेने वाले ग्राहकों का शेयर घटकर 11.4% रह गया है, जो जून 2024 में 14.2% था। मौजूदा क्रेडिट फुटप्रिंट वाले लोगों पर फोकस करके, लेंडर्स अपने रिस्क प्रोफाइल को बेहतर ढंग से मैनेज करने की कोशिश कर रहे हैं।
अनसिक्योर्ड लेंडिंग का बढ़ता जोखिम
इस बदलाव के बावजूद, सेक्टर अभी भी बड़े पैमाने पर अनसिक्योर्ड लोन पर केंद्रित है, जिनमें सिक्योर्ड लेंडिंग की तुलना में अलग तरह के जोखिम होते हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में अनसिक्योर्ड बिज़नेस लोन की ओरिजिनेशन ₹79.9 हजार करोड़ तक पहुंच गई। ऐसे में, एसेट क्वालिटी एक क्रिटिकल फैक्टर बनी हुई है। अगर इकोनॉमिक कंडीशंस टाइट होती हैं, तो अनसिक्योर्ड सेगमेंट में रिपेमेंट पर दबाव सबसे पहले देखने को मिलता है।
NBFC सेक्टर में व्यापक ग्रोथ
यह सेक्टर, NBFCs की व्यापक ग्रोथ के बीच फल-फूल रहा है। NBFC स्पेस में रिटेल क्रेडिट जून 2026 में 20.3% बढ़ा है, जो ट्रेडिशनल बैंक रिटेल लेंडिंग की ग्रोथ रेट से कहीं ज़्यादा है। यह दर्शाता है कि फिनटेक और डिजिटल-फर्स्ट NBFCs अपनी जगह बना रहे हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन फंडिंग कॉस्ट और इंटरेस्ट रेट मूवमेंट्स के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। जब बॉरोइंग कॉस्ट बढ़ती है, तो बैंक फंडिंग पर निर्भर फिनटेक का प्रॉफिट मार्जिन सिकुड़ सकता है।
आगे क्या देखें?
भविष्य में, निवेशकों और मार्केट एनालिस्ट्स को तीन मुख्य क्षेत्रों पर नज़र रखनी होगी: बड़े लोन देते हुए डिफॉल्ट रेट्स को कम रखने की लेंडर्स की क्षमता, उनकी फंडिंग कॉस्ट की स्थिरता, और रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कोई नए रेगुलेटरी गाइडलाइंस। हालांकि बड़े टिकट साइज़ की ओर बदलाव से स्टेबल रेवेन्यू का रास्ता खुलता है, लेकिन अनसिक्योर्ड लेंडिंग एनवायरनमेंट में इस स्ट्रैटेजी का एग्जीक्यूशन ही सेक्टर के लॉन्ग-टर्म हेल्थ का मुख्य संकेतक होगा।
