रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में NBFCs का कुल क्रेडिट पोर्टफोलियो **₹60.64 लाख करोड़** के पार पहुंच गया है। रिटेल लोन, खासकर गोल्ड और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में आई **22%** की उछाल इस तेजी की मुख्य वजह है।
बाजार की स्थिति और क्रेडिट विस्तार
अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, NBFC सेक्टर ने शानदार रफ्तार दिखाई है। कुल क्रेडिट पोर्टफोलियो बढ़कर ₹60.64 लाख करोड़ हो गया है, जो सालाना आधार पर 15.8% की ग्रोथ को दर्शाता है। पिछले महीने यह रफ्तार 14.9% थी। हालांकि, यह अभी भी शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों की 18.8% की ग्रोथ से पीछे है।
रिटेल सेगमेंट बना ग्रोथ का इंजन
सेक्टर की कुल लोन बुक में रिटेल सेगमेंट का हिस्सा अब 44% हो चुका है। इसमें सबसे बड़ा हाथ गोल्ड लोन का रहा, जो 69.1% बढ़कर ₹3.65 लाख करोड़ पहुंच गया है। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में भी 56.4% की बड़ी बढ़त देखी गई और यह ₹77,784 करोड़ हो गया। हाउसिंग लोन में भी 12.1% की वृद्धि के साथ यह आंकड़ा ₹8.62 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
कृषि और अन्य क्षेत्रों की तस्वीर
लेंडिंग प्रायोरिटी में बदलाव दिख रहा है। सर्विसेज सेक्टर में ग्रोथ घटकर 16.2% पर आ गई है, जबकि एग्रीकल्चर लेंडिंग में 17.4% का बड़ा उछाल देखने को मिला है। वहीं, इंडस्ट्रियल क्रेडिट की रफ्तार सुस्त रही और यह सिर्फ 8.4% पर सिमट गई।
निवेशकों के लिए रिस्क और चुनौतियां
तेजी के साथ-साथ निवेशकों को कुछ स्ट्रक्चरल रिस्क पर भी ध्यान देना होगा। गोल्ड लोन में भारी एक्सपोजर होने से कीमतों में अस्थिरता का असर Loan-to-Value (LTV) रेशियो पर पड़ सकता है। साथ ही, बैंकों के मुकाबले फंडिंग कॉस्ट अधिक होने और साल के अंत में संभावित ब्याज दरों में बढ़ोतरी से नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव बढ़ सकता है।
अंत में, रेगुलेटरी मोर्चे पर RBI की कड़ी नजर गवर्नेंस और कंप्लायंस पर बनी हुई है। निवेशकों को आने वाले समय में व्हीकल और पर्सनल लोन पोर्टफोलियो में डेलिनक्वेंसी रेट (delinquency rates) पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
