जुलाई 2026 में NBFC क्रेडिट ग्रोथ रफ्तार पकड़कर **14.9%** पर पहुंच गई है, जो पिछले साल **10.6%** थी। इस तेजी के पीछे गोल्ड और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन की बड़ी भूमिका है, जिससे रिटेल सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
जुलाई 2026 में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) की लेंडिंग एक्टिविटी में जबरदस्त उछाल देखा गया है। पिछले साल के 10.6% के मुकाबले क्रेडिट ग्रोथ बढ़कर 14.9% हो गई है। यह आंकड़ा बताता है कि लेंडर अब इंडस्ट्रियल लेंडिंग से हटकर कंज्यूमर-सेंट्रिक यानी रिटेल सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
गोल्ड और कंज्यूमर डिमांड का जलवा
इस तेजी का मुख्य ड्राइवर गोल्ड और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन हैं। गोल्ड-बैक्ड लोन में सालाना आधार पर 68.5% का भारी उछाल आया है, जो कुल ₹3.54 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल फाइनेंसिंग 51.5% बढ़कर ₹74,644 करोड़ हो गई है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि अब NBFCs की बैलेंस शीट सीधे तौर पर कंज्यूमर स्पेंडिंग और सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो गई है।
रिटेल बनाम इंडस्ट्रियल क्रेडिट का अंतर
रिटेल सेक्टर में 21.4% की मजबूत ग्रोथ दिखी है, जबकि एग्रीकल्चर क्रेडिट में भी 18% का रिकवरी देखने को मिली है। हालांकि, इंडस्ट्रियल क्रेडिट की ग्रोथ घटकर 7.4% रह गई है, जिसका बड़ा कारण इंफ्रास्ट्रक्चर एक्टिविटी में सुस्ती है। सर्विस सेक्टर की ग्रोथ भी पिछले साल के 24.5% से गिरकर 15.2% पर आ गई है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Key Risks)
रिटेल पोर्टफोलियो की यह तेजी मुनाफा तो दे रही है, लेकिन इसके साथ कुछ बड़े रिस्क भी जुड़े हैं:
- गोल्ड प्राइस वोलेटिलिटी: सोने की कीमतों में गिरावट सीधे लेंडर की एसेट क्वालिटी पर असर डाल सकती है।
- पोर्टफोलियो मैच्योरिटी: इतनी तेजी से बढ़ते लोन बुक की असली क्वालिटी समय के साथ ही पता चलेगी, जब लोन 'सीजन' होंगे।
- प्रतिस्पर्धा: गोल्ड लोन मार्केट में बढ़ती भीड़ से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
आने वाले समय में निवेशकों को कंपनियों के तिमाही नतीजों में 'कलेक्शन एफिशिएंसी' और रिस्क मैनेजमेंट पर खास नजर रखनी चाहिए।
