नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) ने मई में क्रेडिट ग्रोथ में **14.2%** की जोरदार उछाल दर्ज की है। इसकी मुख्य वजह रिटेल और एग्रीकल्चर सेक्टर की मजबूत मांग है। खास बात यह है कि गोल्ड ज्वैलरी लोन में **70%** की भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जो कंज्यूमर क्रेडिट के बदलते पैटर्न को साफ दिखाती है। हालांकि, इंडस्ट्रीज और सर्विसेज सेक्टर में ग्रोथ पिछले साल के मुकाबले थोड़ी धीमी पड़ी है।
रिटेल और गोल्ड लोन में बंपर उछाल
मई 2026 में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के क्रेडिट ग्रोथ में 14.2% का इजाफा हुआ है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कुल आउटस्टैंडिंग क्रेडिट बढ़कर ₹58.60 ट्रिलियन हो गया है। यह पिछले साल इसी महीने के 11.4% के ग्रोथ रेट से काफी ज्यादा है।
रिटेल लेंडिंग इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है, जिसमें 19.5% की बढ़ोतरी के साथ ₹25.19 ट्रिलियन का आंकड़ा छुआ है। रिटेल सेगमेंट के अंदर, गोल्ड ज्वैलरी लोन में करीब 70% की भारी तेजी आई है, जो पिछले साल के 38.9% ग्रोथ से काफी ज्यादा है। इससे पता चलता है कि लोग अब गोल्ड को गिरवी रखकर लोन लेने के पैटर्न को तेजी से अपना रहे हैं। वहीं, हाउसिंग लोन की ग्रोथ भी बढ़कर 10.9% हो गई है, जो पिछले साल 5.1% थी। व्हीकल लोन में 14.8% की स्थिर ग्रोथ देखी गई, हालांकि यह मई 2025 के 16.3% से थोड़ा कम है।
एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रीज के लिए लेंडिंग ट्रेंड्स
एग्रीकल्चर सेक्टर को दिए जाने वाले लोन में 17.9% की शानदार ग्रोथ दर्ज की गई है, जो पिछले साल के 5% ग्रोथ रेट के मुकाबले एक बड़ा सुधार है। वहीं, इंडस्ट्रियल सेक्टर में लेंडिंग की रफ्तार धीमी होकर 7.3% पर आ गई है, जो मई 2025 में 10% थी। इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े फाइनेंसिंग में नरमी इसका मुख्य कारण है। सर्विसेज सेक्टर में भी ग्रोथ घटकर 16.7% रह गई है, जबकि पिछले साल यह 23.9% थी। हालांकि, कमर्शियल रियल एस्टेट लेंडिंग में अच्छी ग्रोथ जारी है।
बैंकों से मिल रहा है भरपूर फंड सपोर्ट
NBFCs की यह बढ़ती लेंडिंग क्षमता बैंकों से आसान फंड एक्सेस के कारण संभव हो पा रही है। 31 मई 2026 तक, NBFCs सेक्टर को बैंक क्रेडिट में 33.7% की बढ़ोतरी के साथ ₹20.9 ट्रिलियन तक पहुंच गया। यह पिछले साल के लगभग 1% फ्लैट ग्रोथ के मुकाबले एक बड़ा बदलाव है। इस लिक्विडिटी सपोर्ट से NBFCs कंज्यूमर-केंद्रित सेगमेंट में आक्रामक तरीके से लेंडिंग जारी रख पा रहे हैं।
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि गोल्ड और रिटेल लोन में यह हाई ग्रोथ NBFCs की एसेट क्वालिटी को कैसे प्रभावित करती है। साथ ही, इंडस्ट्रीज लेंडिंग में नरमी का NBFCs के प्रॉफिट मार्जिन पर क्या असर पड़ेगा, यह भी आने वाले नतीजों में देखना अहम होगा। मौजूदा मजबूत मोमेंटम के बावजूद, NBFCs का बैंक क्रेडिट पर निर्भरता, ब्याज दरों या बैंकिंग लिक्विडिटी नीतियों में किसी भी बदलाव से भविष्य की लेंडिंग क्षमता प्रभावित हो सकती है।
