NABARD ने राजस्थान में वाटर सिक्योरिटी और डिजिटल क्रेडिट को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीति का ऐलान किया है। रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के जरिए सिंचाई और को-ऑपरेटिव्स के आधुनिकीकरण से एग्री-टेक सेक्टर में बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं।
बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव
NABARD अब राजस्थान के विकास के लिए क्लाइमेट-रेसिस्टेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल क्रेडिट एकीकरण पर फोकस कर रहा है। 'रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड' के माध्यम से बैंक का मुख्य जोर बड़े पैमाने पर सिंचाई परियोजनाओं, भूजल रिचार्ज और नदी जोड़ो अभियानों पर है, जिससे राज्य में खेती की स्थिरता बढ़ेगी।
PACS का बदलेगा स्वरूप
NABARD की योजना 'प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटीज' (PACS) को बहुउद्देशीय ग्रामीण उद्यमों में बदलने की है। अब तक सिर्फ क्रेडिट देने तक सीमित ये सोसाइटीज आने वाले समय में वेयरहाउसिंग, प्रोक्योरमेंट और रिटेल के हब के रूप में काम करेंगी। यह बदलाव रूरल सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव ला सकता है, जिससे निजी कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती मिल सकती है।
डिजिटल क्रांति और एग्री-टेक
डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स और 'AgriStack' डेटाबेस के जरिए अब किसानों को कर्ज मिलना आसान होगा। 'रिजर्व बैंक इनोवेशन हब' के यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस और 'KRISHIKA' ऐप के उपयोग से कागजी दस्तावेजों की जटिलता खत्म करने की तैयारी है।
निवेशकों के लिए संकेत
अक्टूबर में होने वाली 'रूरल डेवलपमेंट कॉन्क्लेव' इस निवेश के रोडमैप को साफ करेगी। पानी प्रबंधन, सिंचाई और एग्री-टेक कंपनियों के लिए यह पूंजी खर्च बड़े अवसर पैदा कर सकता है। हालांकि, निवेशकों को सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी और लागत बढ़ोतरी जैसे जोखिमों पर भी नजर रखनी होगी।
