NABARD और NaBFID ने **26 अगस्त, 2026** को एक अहम करार किया है, जिसका मकसद ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए मिलकर फंडिंग करना है। यह पार्टनरशिप सिंचाई और कोल्ड स्टोरेज जैसे सेक्टरों में फंडिंग की कमी को पूरा करेगी और डेट मार्केट के निवेशकों के लिए लॉन्ग-टर्म मौकों के नए द्वार खोलेगी।
बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की तैयारी
भारत के दो प्रमुख डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (DFI), NABARD और NaBFID ने हाथ मिला लिया है। इस पार्टनरशिप का मुख्य लक्ष्य NABARD की ग्रामीण पहुंच और NaBFID की बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को फंड करने की एक्सपर्टाइज को एक साथ लाना है। अब ये दोनों संस्थान जॉइंट क्रेडिट स्ट्रक्चरिंग, प्रोजेक्ट अप्रैजल और डेट सिंडिकेशन पर काम करेंगे।
डेट मार्केट के लिए क्या हैं मायने?
आमतौर पर, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में समय बहुत लगता है, इसलिए कमर्शियल बैंक इनमें पैसा लगाने से कतराते हैं। यह पार्टनरशिप इन प्रोजेक्ट्स को 'बैंकेबल' और कमर्शियल रूप से सक्षम बनाएगी। इससे कोल्ड-चेन, रूरल रोड, इरिगेशन और बायो-गैस जैसे सेक्टरों में तेजी आएगी। NaBFID के अक्सर डेट सिक्योरिटीज़ जारी करने के चलते, इस नई साझेदारी से इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड मार्केट में नए स्ट्रक्चर और वॉल्यूम बढ़ने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए अहम सबक
इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का मतलब है लंबा 'जेस्टेशन पीरियड'। डेट मार्केट के निवेशक इन संस्थानों की कार्यक्षमता पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि इनका रिस्क मैनेजमेंट सीधे तौर पर इनके द्वारा जारी किए गए डेट इंस्ट्रूमेंट्स की क्वालिटी तय करेगा। आने वाले समय में, इन संस्थानों द्वारा घोषित किए जाने वाले पहले जॉइंट प्रोजेक्ट्स और उनके डेट इश्यू प्रोग्राम्स पर बाजार की नजर टिकी रहेगी।
