भारतीय म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) इन दिनों बाजार की अस्थिरता (Volatility) से निपटने के लिए 'कवर्ड कॉल' (Covered Call) स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। इस तरीके से फंड मैनेजर अपने शेयर पोर्टफोलियो पर कॉल ऑप्शन बेचकर अतिरिक्त कमाई करने और नुकसान को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बदलाव के कारण स्टॉक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स (Stock Option Contracts) की नेट सेल पोजीशन में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है।
Detailed Coverage
कवर्ड कॉल स्ट्रैटेजी को समझें
'कवर्ड कॉल' स्ट्रैटेजी में दो चीजें एक साथ की जाती हैं: किसी स्टॉक को खरीदना और उसी स्टॉक का कॉल ऑप्शन बेचना। इसका मुख्य मकसद ऑप्शन खरीदार से प्रीमियम (Premium) के रूप में अतिरिक्त आय अर्जित करना है। अगर एक्सपायरी डेट तक स्टॉक की कीमत चुने हुए स्ट्राइक प्राइस (Strike Price) से ऊपर नहीं जाती है, तो ऑप्शन खरीदार के लिए बेकार हो जाता है। ऐसे में, फंड मैनेजर को मिला प्रीमियम फायदा पहुंचाता है। यह आय स्टॉक की कीमत में मामूली गिरावट को कुछ हद तक कवर करने में मदद करती है।
हालांकि, इस स्ट्रैटेजी में एक समझौता भी है। कॉल ऑप्शन बेचकर, फंड मैनेजर स्टॉक की कीमत में अचानक बड़ी तेजी आने पर होने वाले असीमित मुनाफे (Unlimited Gains) को गंवा सकता है। अगर बाजार स्ट्राइक प्राइस से काफी ऊपर चला जाता है, तो फंड मैनेजर को तय कीमत पर शेयर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे उनका मुनाफा सीमित हो जाएगा।
मार्केट डेटा और इंस्टीट्यूशनल अपनाना
मार्केट के आंकड़े बताते हैं कि इंस्टीट्यूशनल निवेशक (Institutional Investors) अपने पोर्टफोलियो को कैसे मैनेज कर रहे हैं, इसमें एक बड़ा बदलाव आया है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के अनुसार, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स द्वारा बेचे गए 'कवर्ड स्टॉक कॉल्स' की नेट पोजीशन में भारी बढ़ोतरी हुई है। फरवरी से पहले, ये पोजीशन शायद ही कभी 300,000 कॉन्ट्रैक्ट्स को पार करती थी। लेकिन 24 मार्च तक, ये बिक्री 556,084 कॉन्ट्रैक्ट्स के शिखर पर पहुंच गई, जो फंड हाउसेस के बीच अधिक सतर्क रुख को दर्शाता है। लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, ये पोजीशन अभी भी 433,542 कॉन्ट्रैक्ट्स पर ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
यह ट्रेंड भारतीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के साथ जुड़ा हुआ है, जो ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल तनावों (Geopolitical Tensions) और ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित हुआ है। चूँकि भारत कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण आयातक (Importer) है, बढ़ती लागतों ने कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाला है और इंडेक्स के प्रदर्शन को प्रभावित किया है। इसके कारण फंड मैनेजर्स ऐसी डिफेंसिव स्ट्रैटेजीज की ओर बढ़ रहे हैं, जो केवल बाजार की ग्रोथ पर निर्भर न हों।
निवेशकों को क्या ध्यान देना चाहिए?
निवेशक इस ट्रेंड पर नजर रख सकते हैं कि यह कैसे विकसित होता है, क्योंकि स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (Specialized Investment Funds) का यह वर्ग लगातार बढ़ रहा है। भले ही ये स्ट्रैटेजी सपाट बाजारों में आय अर्जित करने का एक तरीका प्रदान करती हैं, लेकिन ये प्रोफेशनल मनी मैनेजर्स (Professional Money Managers) के सतर्क दृष्टिकोण का भी संकेत देती हैं। इन डिफेंसिव मूव्स की सफलता अक्सर ऑप्शन मार्केट को सही ढंग से टाइम करने में मैनेजर की क्षमता पर निर्भर करती है। भविष्य में फंड के प्रदर्शन पर अपडेट, खासकर बाजार में तेज रिकवरी की अवधि के दौरान, यह दिखाएगा कि क्या यह स्ट्रैटेजी डाउनसाइड प्रोटेक्शन (Downside Protection) और अपसाइड पोटेंशियल (Upside Potential) के त्याग के बीच प्रभावी ढंग से संतुलन बनाती है।
