लिक्विडिटी की दौड़
म्यूचुअल फंड में इंस्टेंट विथड्रॉअल (Instant Withdrawal) की सुविधा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। CAMS-सर्विस वाले फंड्स में जनवरी 2025 तक 2.3 मिलियन से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए हैं, जिनकी कुल वैल्यू ₹2,112 करोड़ है। जिन निवेशकों ने इन सुविधाओं का लाभ उठाया, उनकी संख्या FY2020-21 के 2.55 लाख से बढ़कर 2025 के अंत तक 5.84 लाख से अधिक हो गई है।
यह ट्रेंड खास है क्योंकि ज्यादातर निकासी छोटी रकम की है। 68% ट्रांजैक्शन ₹5,000 या उससे कम के हैं, जो बताता है कि निवेशक अपनी छोटी-मोटी लिक्विडिटी (तरलता) की जरूरतों को पूरा करने के लिए इन फंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि 22% ट्रांजैक्शन, जिनकी वैल्यू लगभग ₹359 करोड़ है, सामान्य कामकाजी घंटों के बाहर या वीकेंड पर हुए हैं। यह दिखाता है कि निवेशकों को 24x7 फंड एक्सेस चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे सेविंग्स अकाउंट में मिलता है।
निवेशक व्यवहार में बदलाव का विश्लेषण
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने जबरदस्त ग्रोथ दिखाई है, जिसका AUM (Assets Under Management) जनवरी 2026 तक ₹81 ट्रिलियन पार कर गया है। रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, खासकर SIPs (Systematic Investment Plans) के जरिए, ने लंबी अवधि की वेल्थ क्रिएशन की आदत को बढ़ावा दिया है। अकेले दिसंबर 2025 में SIP इनफ्लो ₹31,002 करोड़ रहा।
लेकिन, इंस्टेंट विथड्रॉअल का यह बढ़ता चलन एक अलग तस्वीर पेश करता है। आदित्य बिड़ला सन लाइफ, HDFC, और DSP जैसे कई फंड हाउस ₹50,000 या इन्वेस्टमेंट वैल्यू के 90% तक की निकासी की सुविधा देते हैं। लेकिन कुल मिलाकर यह दिखाता है कि निवेशकों का एक बड़ा वर्ग म्यूचुअल फंड को सिर्फ पैसे निकालने लायक कैश पूल के तौर पर देख रहा है, न कि लंबी अवधि के निवेश के तौर पर। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे निवेशक पहले बैंक डिपॉजिट या हाल ही में ओवरनाइट फंड्स (Overnight Funds) को समझते थे, जो तुरंत लिक्विडिटी देते थे।
चिंताएं और भविष्य की राह
इंस्टेंट विथड्रॉअल की सुविधा बेशक सुविधाजनक है, लेकिन इसके बढ़ते इस्तेमाल से निवेशक साइकोलॉजी और इंडस्ट्री के लॉन्ग-टर्म हेल्थ पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि म्यूचुअल फंड को वेल्थ क्रिएशन के बजाय हाई-यील्ड सेविंग्स अकाउंट समझा जा रहा है। इससे निवेशकों को नुकसान हो सकता है, जैसे कि मार्केट में गिरावट के दौरान जल्दी पैसा निकाल लेना और कंपाउंडिंग (Compounding) का फायदा खो देना।
Zerodha Fund House, जिसने दो साल में ₹10,000 करोड़ का AUM पार किया है, वह भी एक्सेसिबल प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रहा है। लेकिन अगर इंस्टेंट रिडेम्पशन फीचर्स पर ज्यादा जोर दिया गया, तो यह ट्रांजैक्शनल माइंडसेट को बढ़ावा दे सकता है। अगर यह ट्रेंड बढ़ता है, तो फंड मैनेजर्स पर भारी कैश रिजर्व बनाए रखने का दबाव होगा, जिससे पोर्टफोलियो रिटर्न पर असर पड़ सकता है। रेगुलेटर्स ने भी पहले लिक्विडिटी को लेकर चिंता जताई थी, जिससे यह साफ है कि वे इस तरह के निवेशक व्यवहार से वाकिफ हैं।