भारत के टॉप म्यूचुअल फंड हाउसों से निवेशकों का मोहभंग होता दिख रहा है। अप्रैल-जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, टॉप 10 एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) का मार्केट शेयर गिरकर **65.1%** रह गया है, जो पिछले साल **72.8%** था। इसका सीधा असर दिग्गज कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।
बाजार का बदला मूड
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी मार्केट के बेताज बादशाह कहे जाने वाले बड़े फंड हाउसों का दबदबा कम हो रहा है। इंडस्ट्री के टॉप 3 दिग्गजों का कंसंट्रेशन भी 42% से घटकर 34% पर आ गया है। निवेशक अब ब्रांड के बजाय बेहतर 'अल्फा' (Alpha) यानी मार्केट से ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड्स को तरजीह दे रहे हैं।
कौन से फंड्स हैं डिमांड में?
Bandhan, HSBC, Invesco और Edelweiss जैसे छोटे और चुस्त फंड हाउसों ने पिछले 1 से 3 सालों में शानदार रिटर्न दिया है, जिसके चलते निवेशकों का रुझान इनकी तरफ बढ़ा है।
लिस्टेड AMCs के लिए चेतावनी
ज्यादातर लिस्टेड कंपनियों की कमाई उनके द्वारा मैनेज किए जाने वाले एसेट्स (AUM) पर मिलने वाली फीस से होती है। अगस्त 2026 तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल AUM ₹87.1 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है, लेकिन इक्विटी में ग्रोथ अब थोड़ी धीमी होकर 18.5% के आसपास रहने का अनुमान है। अगर टॉप AMCs का मार्केट शेयर इसी तरह गिरता रहा, तो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को फायदा
दिलचस्प बात यह है कि इस बदलाव से Prudent Corporate Advisory Services और KFin Technologies जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को कोई फर्क नहीं पड़ता। इनकी कमाई ट्रांजेक्शन और प्रोसेसिंग पर निर्भर करती है, चाहे पैसा किसी भी फंड हाउस में जाए। ऐसे में निवेशक इनके स्टॉक्स पर भी नजर रख सकते हैं।
