भारतीय म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) असेट्स ने पहली बार फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) की होल्डिंग्स को पीछे छोड़ दिया है। जून 2026 तक, कुल असेट्स ₹76.41 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए, जो एफआईआई की ₹76.22 लाख करोड़ की होल्डिंग्स से ज़्यादा है।
एफआईआई (FII) की बिकवाली का असर
यह ऐतिहासिक उपलब्धि तब हासिल हुई है जब एफआईआई (FII) ने 2026 के दौरान लगातार बिकवाली की है। जून 2026 तक, एफआईआई ने लगभग $28 बिलियन के नेट इक्विटी आउटफ्लो दर्ज किए। मार्केट में करेक्शन, हाई वैल्यूएशन, कमजोर कॉरपोरेट अर्निंग्स और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन जैसे कई कारणों से विदेशी निवेशकों की इक्विटी होल्डिंग्स में लगभग 12% की गिरावट आई, जो सितंबर 2024 के अपने चरम से घटकर जून 2026 तक ₹68.65 लाख करोड़ रह गई। वहीं, इसी अवधि में म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी असेट्स में लगभग 23.3% का इजाफा हुआ और यह ₹54.50 लाख करोड़ तक पहुंच गई।
डेट और पैसिव फंड्स का बढ़ा दबदबा
म्यूचुअल फंड असेट्स में इस उछाल का बड़ा श्रेय डेट फंड्स (Debt Funds) और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की ग्रोथ को जाता है। म्यूचुअल फंड्स ने डेट और ईटीएफ (ETF) में ₹21.91 लाख करोड़ निवेश किए, जो एफआईआई (FII) के इसी सेगमेंट में ₹7.58 लाख करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है। पैसिव इनवेस्टिंग की लोकप्रियता बढ़ी है, जिसमें गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) और सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF) का खास योगदान रहा। जून 2026 तक, गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) असेट्स ₹1.68 लाख करोड़ और सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF) असेट्स ₹77,700 करोड़ तक पहुंच गए।
घरेलू बचत में बदलाव
यह ट्रेंड भारतीय घरेलू बचत में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। निवेशक अब फिजिकल गोल्ड, रियल एस्टेट और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे पारंपरिक साधनों से हटकर ज्यादा रेगुलेटेड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डेट फंड्स निवेशकों के लिए आकर्षक बन गए हैं क्योंकि वे 7% से अधिक सालाना रिटर्न दे रहे हैं। वहीं, ईटीएफ (ETF) जैसे पैसिव फंड्स अपनी कम लागत, पारदर्शिता और रिटेल निवेशकों की बढ़ती फाइनेंशियल लिटरेसी के कारण लोकप्रिय हो रहे हैं। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए लगातार डोमेस्टिक लिक्विडिटी का फ्लो मार्केट की वोलेटिलिटी को एब्जॉर्ब करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
