कंपनी ने कैसे मारी बाजी?
Muthoot Microfin (MML) के लिए पिछला फाइनेंशियल ईयर (FY26) शानदार रहा है, जो FY25 की चुनौतियों के बाद माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में रिकवरी का संकेत दे रहा है। कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 13% बढ़कर ₹14,006 करोड़ पर पहुंच गया, जो मैनेजमेंट की गाइडेंस से भी बेहतर है। यह ग्रोथ बढ़ी हुई डिस्पर्सल (disbursements) के चलते संभव हुई, जिसमें Q4 FY26 की रन-रेट FY25 से पहले के स्तरों को पार कर गई।
एसेट क्वालिटी में सुधार और नए प्रोडक्ट्स में विस्तार
कंपनी की एसेट क्वालिटी में भी स्थिरता देखी गई है। FY26 में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) घटकर 3.89% पर आ गया, जबकि पिछले साल यह 4.84% था। क्रेडिट कॉस्ट में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो FY26 में 3.5% पर आ गई, जबकि FY25 में यह 9.4% थी। Q4 FY26 तक कलेक्शन एफिशिएंसी सुधरकर 96.43% हो गई।
MML का पारंपरिक ज्वाइंट लायबिलिटी ग्रुप (JLG) लेंडिंग से हटकर नए प्रोडक्ट्स में विस्तार भी फायदेमंद साबित हो रहा है। मार्च 2026 तक नॉन-JLG पोर्टफोलियो (जिसमें इंडिविजुअल लोन, माइक्रो-LAP और गोल्ड लोन शामिल हैं) का कंट्रीब्यूशन बढ़कर 17% हो गया, जो मार्च 2025 में सिर्फ 3% था। खास बात यह है कि इंडिविजुअल लोन बुक में लगभग जीरो डिफॉल्सी (delinquency) देखी गई है।
डिस्काउंट पर मिल रहा शेयर, M&A की सुगबुगाहट
इन सकारात्मकগুলোর बीच, MML का स्टॉक अपने साथियों की तुलना में काफी सस्ते वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। यह शेयर अपनी FY28 की अनुमानित बुक वैल्यू के लगभग 1.1-1.2 गुना पर मिल रहा है। वहीं, CreditAccess Grameen (CAGL) जैसी कंपनियां अपनी बुक वैल्यू के लगभग 2.2 गुना पर ट्रेड कर रही हैं। MML का पिछले बारह महीनों का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings ratio) नेगेटिव है, जबकि CAGL का P/E लगभग 41.7x है।
माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में M&A (मर्जर और एक्वीजिशन) की चर्चाएं भी इस वैल्यूएशन गैप को बढ़ा रही हैं। भले ही Axis Bank ने CAGL के अधिग्रहण की किसी भी बोली में शामिल होने से इनकार किया हो, लेकिन सेक्टर में किसी भी बड़ी रणनीतिक डील का असर MML जैसी अन्य लिस्टेड कंपनियों के वैल्यूएशन पर पड़ सकता है।
भविष्य की संभावनाएं और जोखिम
सेक्टर में FY26 के लिए 4-15% और FY27 के लिए 15-17% AUM ग्रोथ का अनुमान है। MML भी FY26 और FY27 में बेहतर RoA (रिटर्न ऑन एसेट्स) हासिल करने की उम्मीद कर रहा है।
हालांकि, कंपनी कुछ जोखिमों का सामना भी कर रही है। Muthoot Group के मैनेजिंग डायरेक्टर जॉर्ज अलेक्जेंडर मथूट के खिलाफ ED द्वारा दर्ज की गई धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की एफआईआर ग्रुप की सभी कंपनियों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। इसके अतिरिक्त, नए लोन प्रोडक्ट्स में तेजी से विस्तार के साथ अंडरराइटिंग क्वालिटी बनाए रखना और कैपिटल जुटाना भी अहम चुनौतियां हैं।
इन सबके बावजूद, एनालिस्ट्स (Analysts) MML के भविष्य को लेकर उत्साहित हैं। JM Financial ने ₹300 के टारगेट प्राइस के साथ 'BUY' रेटिंग को बरकरार रखा है, वहीं CRISIL ने कंपनी के आउटलुक को पॉजिटिव किया है।
