Muthoot Microfin ने नए फाइनेंशियल ईयर (FY27) की शानदार शुरुआत की है। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (Standalone Net Profit) 12 गुना बढ़कर ₹81.3 करोड़ हो गया है। एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में सुधार और मैनेजमेंट के दमदार फैसलों के चलते कंपनी के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 18% का इजाफा हुआ है।
शानदार नतीजों से निवेशकों में खुशी की लहर
Muthoot Microfin ने 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 12 गुना बढ़कर ₹81.3 करोड़ पर पहुंच गया है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) 19.6% बढ़कर ₹670 करोड़ दर्ज किया गया, जो कंपनी के लगातार ऑपरेशनल सुधार और बेहतर क्रेडिट कंट्रोल को दर्शाता है।
AUM में 18% की ग्रोथ, नॉन-JLG पर फोकस
कंपनी के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 18% की बढ़त देखी गई और यह ₹14,457 करोड़ पर पहुंच गया। इस ग्रोथ का मुख्य कारण रिकॉर्ड ₹2,645 करोड़ का तिमाही डिस्बर्समेंट (Disbursement) रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 49% ज़्यादा है। कंपनी की एक अहम रणनीति अपने पारंपरिक जॉइंट लायबिलिटी ग्रुप (JLG) लेंडिंग पर निर्भरता कम करना है। जून 2026 के अंत तक, नॉन-JLG सेगमेंट कंपनी के कुल लोन पोर्टफोलियो का 24% हिस्सा बन चुका था।
गोल्ड लोन में विस्तार और बेहतर एसेट क्वालिटी
इसके अलावा, कंपनी ने अपनी पेरेंट कंपनी Muthoot Fincorp के साथ मिलकर गोल्ड लोन डिस्बर्समेंट (Gold Loan Disbursement) की शुरुआत भी की है। इस पार्टनरशिप से कंपनी को ग्रुप के मजबूत ब्रांच नेटवर्क का फायदा उठाते हुए सिक्योर लेंडिंग बिजनेस (Secured Lending Business) का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
कंपनी की एसेट क्वालिटी में भी स्थिरता देखी गई है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) रेश्यो घटकर 3.70% पर आ गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 115 बेसिस पॉइंट कम है। वहीं, क्रेडिट कॉस्ट (Credit Cost) भी घटकर 2.6% पर आ गई है, जो कंपनी के पिछले अनुमानों से कम है। जून 2026 में CRISIL ने कंपनी की लॉन्ग-टर्म क्रेडिट रेटिंग को AA-/Stable तक अपग्रेड किया है, जिससे कंपनी को बॉरोइंग कॉस्ट (Borrowing Cost) कम करने में मदद मिलेगी।
आगे की राह और चुनौतियां
हालांकि, कंपनी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। मैनेजमेंट ने अगले दो सालों में नॉन-JLG पोर्टफोलियो को 40% तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसमें एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) शामिल है। इसके अलावा, माइक्रोफाइनेंस सेक्टर (Microfinance Sector) व्यापक आर्थिक चक्रों (Economic Cycles) और संभावित रेगुलेटरी बदलावों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। बाजार अब 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को होने वाली निवेशक मीटिंग्स (Investor Meetings) पर नज़र रखेगा।
