Muthoot Microfin ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का कुल लोन पोर्टफोलियो **22%** बढ़कर **₹15,323 करोड़** पर पहुंच गया है, साथ ही फंड जुटाने की लागत (Borrowing Cost) में भी बड़ी गिरावट आई है।
ग्रोथ की रफ्तार
30 सितंबर, 2026 तक कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹15,323 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 22% अधिक है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी ने ₹2,900 करोड़ के नए लोन बांटे हैं, जो सालाना आधार पर 28% की ग्रोथ दिखाते हैं।
फंड की लागत में सुधार
कंपनी के लिए सबसे राहत की बात यह है कि उसकी फंडिंग कॉस्ट पहली बार 9.93% के साथ सिंगल डिजिट में आ गई है, जो पिछली तिमाही में 10.13% थी। लिक्विडिटी को बनाए रखने के लिए कंपनी ने तिमाही के दौरान ₹3,213 करोड़ जुटाए हैं और अब उनके पास ₹6,029 करोड़ की कुल लिक्विडिटी और क्रेडिट लाइन उपलब्ध है।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
Muthoot Microfin अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी पारंपरिक जॉइंट लायबिलिटी ग्रुप लोन पर अपनी निर्भरता कम कर रही है। मार्च 2026 में जो रेशियो 83:17 था, वह अब बदलकर 69:31 हो गया है। कंपनी ने अब इंडिविजुअल माइक्रो-एंटरप्राइज लोन बुक को बढ़ाकर ₹4,164 करोड़ कर दिया है। इसके अलावा, पेरेंट कंपनी Muthoot Fincorp के साथ मिलकर गोल्ड लोन के जरिए भी कंपनी अपनी कमाई बढ़ा रही है।
डिजिटल और ऑपरेशनल मजबूती
कंपनी का डिजिटल कलेक्शन 47% वॉल्यूम तक पहुंच गया है, जो एक साल पहले सिर्फ 25% था। कलेक्शन एफिशिएंसी 98.11% पर स्थिर बनी हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले 477 बेसिस पॉइंट्स का सुधार है। हालांकि, निवेशकों को रेगुलेटरी बदलावों और दक्षिणी राज्यों में लोन बुक के कंसंट्रेशन जैसे जोखिमों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि कंपनी अब अनसेक्योर्ड लेंडिंग पोर्टफोलियो की ओर बढ़ रही है।
