नतीजों के बाद मार्केट में गिरावट
Muthoot Finance के निवेशकों के लिए 13 फरवरी 2026 का दिन मायूसी भरा रहा। कंपनी के शेयर 11% से ज्यादा की भारी गिरावट के साथ ₹3,610 पर आ गए। ये गिरावट ऐसे समय में आई जब कंपनी ने अपनी तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे पेश किए, जिनमें 94.9% की शानदार सालाना बढ़ोतरी के साथ ₹2,656 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया गया। कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income) भी 64% बढ़कर ₹4,467 करोड़ रही और एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 48% का जबरदस्त इजाफा देखा गया। लेकिन इन मजबूत आंकड़ों के बावजूद, निवेशकों ने स्टॉक को बेचकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं।
एनालिस्ट्स में बंटी राय: 'खरीदो' या 'रोको'?
Muthoot Finance पर ब्रोकरेज फर्मों की राय बंटी हुई है। Nuvama Institutional Equities ने 'Buy' रेटिंग और ₹4,700 का टारगेट प्राइस बनाए रखा है। उनकी तरफ से AUM ग्रोथ (12% QoQ, 50% YoY), नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में 11 bps का सुधार और ग्रॉस स्टेज 3 लोन रेश्यो में कमी को पॉजिटिव माना गया है। Jefferies ने भी 'Buy' रेटिंग देते हुए ₹4,750 का टारगेट दिया है, जो सोने की कीमतों और ब्रांच विस्तार नियमों में ढील के सहारे AUM ग्रोथ की उम्मीद जताते हैं।
वहीं, Motilal Oswal Financial Services ने 'Neutral' रेटिंग और ₹4,500 का टारगेट रखा है। उनकी चिंता का मुख्य कारण तिमाही के नतीजों में एकमुश्त (one-off) रिकवरी इनकम का बड़ा हिस्सा होना है। कुल मिलाकर, 12 ब्रोकरेज 'Buy', 8 'Hold' और 5 'Sell' की सलाह दे रहे हैं, जिनका औसत टारगेट प्राइस ₹4,018 के आसपास है।
कमाई की क्वालिटी पर सवाल
Muthoot Finance के Q3 FY26 के नतीजों में सबसे खास बात पुराने नॉन-परफॉर्मिंग अकाउंट्स (NPLs) और अन्य संपत्तियों की रिकवरी से मिला बड़ा बूस्ट था। Nuvama की रिपोर्ट के अनुसार, NPL रिकवरी, ऑक्शन और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों से ₹624 करोड़ की इनकम हुई, जो पिछली तिमाही के ₹300 करोड़ से काफी ज्यादा है। Motilal Oswal ने भी इसी तरह ₹650-750 करोड़ की वन-ऑफ इंटरेस्ट इनकम का जिक्र किया है, जिसमें ₹120 करोड़ ऑक्शन से और ₹40 करोड़ एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों से आए। इस एकमुश्त कमाई की वजह से असली ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी पर सवाल उठ रहे हैं और यह चिंता बढ़ रही है कि क्या कंपनी भविष्य में भी इसी स्तर का मुनाफा बनाए रख पाएगी।
ऑपरेशनल परफॉरमेंस और एसेट क्वालिटी
ऑपरेशनल फ्रंट पर, कंपनी का कंसोलिडेटेड लोन AUM ₹1,64,720 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल से 48% ज्यादा है। इसमें गोल्ड लोन AUM ₹1,39,658 करोड़ रहा, जिसमें 50% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी ने एसेट क्वालिटी में भी सुधार दिखाया है, जहां ग्रॉस स्टेज 3 लोन घटकर ₹2,324 करोड़ (जो कि कुल AUM का 1.58% है) रह गए, जो पिछले क्वार्टर में ₹2,977 करोड़ (2.25%) थे। क्रेडिट कॉस्ट भी घटकर 32 basis points पर आ गई। हालांकि, गोल्ड टनेज में 2% की तिमाही गिरावट और लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेश्यो का 56.5% से घटकर 55.8% पर आना कुछ संभावित चुनौतियों की ओर इशारा करता है।
भविष्य की राह और जोखिम
मैनेजमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए 30-35% AUM ग्रोथ का अपना लक्ष्य बरकरार रखा है। एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि कंपनी का मुनाफा अगले कुछ सालों में 17% CAGR की दर से बढ़ सकता है। हालांकि, 3.76 का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो, बैंकों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव जैसे जोखिम मौजूद हैं। Muthoot Finance का P/E रेश्यो लगभग 20-21x है, जबकि इसका मार्केट कैप ₹1.44 ट्रिलियन के करीब है। यह सब देखते हुए, निवेशकों की नजर अब कंपनी की कोर बिजनेस ग्रोथ और रिकवरी इनकम पर निर्भरता पर टिकी रहेगी।