Muthoot Finance का Q2 FY27 मुनाफा **₹3,250 करोड़** रहा, लेकिन कंपनी का ग्रॉस NPA रेशियो **2.28%** से बढ़कर **3.87%** पर पहुंच गया है। इस गिरावट की मुख्य वजह RBI के नए मंथली रीपेमेंट नियम हैं।
मुनाफे में बढ़त के बावजूद NPA का टेंशन
कंपनी ने चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹3,250 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹2,420 करोड़ था। कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) भी सालाना 42% बढ़कर ₹2.09 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। हालांकि, इन मजबूत आंकड़ों के बीच एसेट क्वालिटी पर सवाल उठ रहे हैं। सितंबर के अंत तक कंपनी का ग्रॉस NPA रेशियो बढ़कर 3.87% हो गया, जो पिछली तिमाही में 2.28% था।
क्यों बढ़े खराब लोन (NPA)?
मैनेजमेंट के अनुसार, यह समस्या 1 अप्रैल 2026 से लागू RBI के नए गोल्ड लोन गाइडलाइंस के कारण आई है। पहले 'बुलेट रीपेमेंट' मॉडल चलता था, जहां लोन के अंत में एक साथ पैसा देना होता था, लेकिन अब 12 महीने से अधिक के लोन के लिए मंथली पेमेंट अनिवार्य है। इस बदलाव के साथ तालमेल बिठाने में ग्राहकों को दिक्कत हो रही है, जिससे लोन रीपेमेंट में अस्थायी देरी हो रही है।
मार्केट का रिएक्शन और शेयर की चाल
2 नवंबर 2026 को शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव दिखा। शुरुआत में शेयर गिरकर ₹2,305 के 52-वीक लो पर चला गया, लेकिन बाद में निवेशकों को यह बात समझ आई कि यह पूरी तरह से रेगुलेटरी बदलाव का नतीजा है। इसके बाद शेयर में 8-9% की शानदार रिकवरी दर्ज की गई।
रेगुलेटरी चुनौतियां
केवल NPA ही नहीं, बल्कि अनुपालन (Compliance) भी एक चिंता का विषय है। इससे पहले जुलाई 2026 में RBI ने KYC नियमों के उल्लंघन के लिए ₹5.80 लाख का जुर्माना लगाया था। Shriram Finance जैसे अन्य पियर्स में भी गोल्ड लोन एसेट्स पर दबाव दिख रहा है, जो यह दर्शाता है कि पूरा सेक्टर इस समय कड़े नियमों के अनुकूल होने की प्रक्रिया से गुजर रहा है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या लोन रिकवरी रेट में सुधार आता है और कंपनी कब तक अपने NPA को स्थिर कर पाती है।
