सोने की चाल ने दिखाया असर
शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को Muthoot Finance के शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। NSE और BSE दोनों पर स्टॉक 12% से ज्यादा लुढ़क गया। यह गिरावट तब आई जब कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) के मजबूत नतीजे घोषित किए थे। इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह सोने की कीमतों में आई तेज अस्थिरता को माना जा रहा है। निवेशकों का ध्यान कंपनी के हालिया शानदार नतीजों से हटकर, बुलियन मार्केट (Gold Market) के अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव पर चला गया, जिसका सीधा असर लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेश्यो और लोन बांटने की ग्रोथ पर पड़ता है।
Q3FY26 के नतीजे: एक तरफा कहानी
इसके बावजूद, कंपनी के दिसंबर 2025 तिमाही के नतीजे काफी दमदार थे। Muthoot Finance ने बताया कि उसके गोल्ड लोन एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में पिछले साल के मुकाबले करीब 50% का उछाल आया, जो ₹1.4 ट्रिलियन तक पहुंच गया। नेट प्रॉफिट पिछले साल की तुलना में 95% बढ़कर लगभग ₹2,660 करोड़ हो गया। इस मुनाफे में लगभग ₹650 करोड़ का एक बार का इंटरेस्ट इनकम (One-off interest income) भी शामिल था। नेट टोटल इनकम 66% बढ़ी और कॉस्ट-टू-इनकम रेश्यो 20% पर कुशल बना रहा। ग्रॉस-स्टेज 3 एसेट्स में 65-बेसिस पॉइंट का सुधार भी देखा गया।
बुलियन की अस्थिरता का ओवरहैंग
विश्लेषकों का कहना है कि सोने की कीमतों में हालिया बड़ी गिरावट Muthoot Finance के लिए सबसे बड़ी चिंता का सबब है। इस कैलेंडर ईयर की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद, डॉलर के मजबूत होने और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने में मुनाफावसूली हुई। घरेलू सोने की कीमतों में आई इस गिरावट ने लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेश्यो की स्थिरता और लोन बांटने (Disbursement Growth) की रफ्तार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। आम तौर पर, सोने की ऊंची कीमतें बड़े लोन साइज और बेहतर कोलैटरल कवरेज की ओर ले जाती हैं। इसके विपरीत, कीमतों में बड़ी गिरावट या अत्यधिक अस्थिरता से ग्राहक सावधानी बरत सकते हैं, जिससे लोन ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।
वैल्यूएशन और पियर्स से तुलना
फिलहाल Muthoot Finance का ट्रेलिंग बारह महीने (TTM) प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो लगभग 19.9 से 21.87 के बीच है। इसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1.58 ट्रिलियन है। तुलना के लिए, इसके पियर Manappuram Finance का P/E रेश्यो काफी ज्यादा, लगभग 66.50 है, और मार्केट कैप लगभग ₹25,612 करोड़ है। अन्य NBFCs जैसे Shriram Finance (P/E 21.78), Cholamandan Investment and Finance (P/E 30.29), और Bajaj Finance (P/E 32.93) भी इसी सेक्टर में काम करती हैं। हालांकि, Manappuram Finance जैसे कुछ पियर्स की तुलना में Muthoot Finance का वैल्यूएशन अधिक वाजिब लग रहा है, लेकिन बाजार का ध्यान सोने की कीमतों के जोखिम पर होने के कारण ये मेट्रिक्स पीछे छूट गए।
एनालिस्ट की राय और सेक्टर का माहौल
Motilal Oswal Financial Services ने Muthoot Finance पर 'Neutral' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस ₹4,500 किया है। ब्रोकरेज ने मजबूत ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि सोने की कीमतों की अस्थिरता एक अहम फैक्टर बनी रहेगी। अन्य विश्लेषकों का नजरिया आम तौर पर सकारात्मक है, जहां 19 विश्लेषकों की 'Buy' रेटिंग है और औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट लगभग ₹3,761.84 है, जो मौजूदा स्तरों से संभावित गिरावट का संकेत देता है। TradingView के विश्लेषकों ने ₹3,820.36 का लक्ष्य दिया है। NBFC सेक्टर में ग्रोथ दिख रही है, लेकिन अनसिक्योर्ड लोन सेगमेंट में लाभप्रदता में गिरावट और क्रेडिट लागत बढ़ने जैसी चुनौतियां भी हैं। हालांकि, गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों ने एसेट्स अंडर मैनेजमेंट में 29% की सालाना ग्रोथ का अनुमान है। मौजूदा बाजार की प्रतिक्रिया से लगता है कि Muthoot Finance, मार्केट लीडर होने के बावजूद, कमोडिटी प्राइस में उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील है।
बेयर केस: गोल्ड पर निर्भरता का जोखिम
Muthoot Finance के लिए सबसे बड़ा कंसर्न सोने की कीमतों पर उसकी स्वाभाविक निर्भरता है। सोने के मूल्य में बड़ी और लगातार गिरावट कंपनी के कोलैटरल वैल्यूएशन के लिए सीधा खतरा पैदा कर सकती है, जिससे लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेश्यो अस्थिर हो सकता है या लोन बांटने की ग्रोथ को कम करना पड़ सकता है। कंपनी के Q3FY26 नतीजों में गोल्ड के टनेज में तिमाही-दर-तिमाही 2% की गिरावट और गोल्ड लोन LTV में 75-बेसिस पॉइंट की कमी ( 55.8% तक) देखी गई। हालांकि मैनेजमेंट का कहना है कि लोन ग्रोथ ग्राहक की लिक्विडिटी की जरूरत और अनसिक्योर्ड से शिफ्ट होने के कारण है, लेकिन सोने की कीमतों में तेज गिरावट से यह समीकरण बदल सकता है और लोन बुक की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
