इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में **2%** की शानदार तेजी के बाद Muthoot Finance और Manappuram Finance के शेयरों में रौनक लौटी है। सोने की बढ़ती कीमत कंपनियों के लिए कोलैटरल की सुरक्षा तो बढ़ाती है, लेकिन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी कीमतों से घरेलू मांग पर दबाव का जोखिम भी बना हुआ है।
सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई 2% की भारी तेजी का असर घरेलू मार्केट पर साफ दिख रहा है। 4 नवंबर, 2026 को Muthoot Finance का शेयर 3.01% की बढ़त के साथ ₹2,621.95 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया।
गोल्ड लेंडर्स के लिए सोने की कीमतों का महत्व
गोल्ड लोन कारोबार में सोने की कीमत सबसे अहम पैमाना है। जब सोना महंगा होता है, तो कंपनियों के पास रखे गिरवी (Collateral) की वैल्यू बढ़ जाती है, जिससे कर्ज देने वाली कंपनियों का रिस्क प्रोफाइल कम हो जाता है। निवेशक इन शेयरों को अक्सर सोने की कीमतों का प्रॉक्सी मानते हैं, क्योंकि कीमती मेटल के दाम बढ़ने से लोन डिफॉल्ट का खतरा घट जाता है।
क्या मांग पर पड़ेगा असर?
हालांकि, यह सिक्का का एक ही पहलू है। भारत में 24-कैरेट सोना फिलहाल ₹1,41,980 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है। इतनी ज्यादा कीमतें ग्राहकों को लोन लेने से रोक सकती हैं। ऐतिहासिक रूप से, सोने के बहुत महंगे होने पर घरेलू जूलरी डिमांड में गिरावट देखी गई है, जो इन नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के नए लोन ओरिजिनेशन (Origination) को प्रभावित कर सकती है।
मार्केट रिस्क और आगे का नजरिया
मौजूदा तेजी की मुख्य वजह अमेरिकी मिड-टर्म इलेक्शन के बाद कमजोर हुआ डॉलर और गिरती ट्रेजरी यील्ड है। हालांकि, फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की 78% संभावना बनी हुई है, जो सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकती है।
अब निवेशकों की नजरें अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर हैं। यह डेटा तय करेगा कि आने वाले समय में फेड की पॉलिसी क्या होगी। अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो यह सोने की रैली के लिए चुनौती साबित हो सकता है।
