Mufin Green Finance को मिली हरी झंडी! शेयर बाज़ार से ₹[Amount] करोड़ जुटाने की राह खुली

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Mufin Green Finance को मिली हरी झंडी! शेयर बाज़ार से ₹[Amount] करोड़ जुटाने की राह खुली
Overview

Mufin Green Finance Limited को शेयर बाज़ार (BSE और NSE) से अपने शेयर्स और वॉरंट्स की प्रीफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इस कदम से कंपनी अपने ग्रीन फाइनेंस ऑपरेशन्स को बढ़ाने के लिए पूंजी जुटाएगी।

Mufin Green Finance को मिली बड़ी मंज़ूरी, पूंजी जुटाने की राह आसान

Mufin Green Finance Limited के लिए यह एक बड़ी खबर है। कंपनी को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) दोनों से प्रीफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) के लिए इन-प्रिंसिपल (in-principle) यानी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इस मंज़ूरी के बाद कंपनी लगभग 3,43,03,482 इक्विटी शेयर और 76,53,061 वॉरंट्स खास निवेशकों को अलॉट कर सकेगी। यह पूंजी जुटाना कंपनी के लिए इसलिए अहम है क्योंकि वह ग्रीन फाइनेंस सेक्टर, खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) प्रोजेक्ट्स में अपने विस्तार की योजना बना रही है।

पूंजी जुटाने का मक़सद

प्रीफरेंशियल इश्यू एक ऐसा तरीका है जिसमें एक कंपनी चुनिंदा निवेशकों के एक समूह को पहले से तय की गई कीमत पर शेयर या वॉरंट बेचती है, जो अक्सर बाज़ार भाव से प्रीमियम पर होते हैं। Mufin Green Finance के लिए, यह पूंजी जुटाना उनके मुख्य काम, यानी आगे लोन देने (onward lending), को गति देगा। कंपनी EV, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए लोन दे रही है और अब अपने एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) को काफी बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। मार्च 2025 तक, कंपनी का AUM लगभग ₹838.44 करोड़ था, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹624.14 करोड़ से एक बड़ा उछाल है। जुटाई गई राशि इस ग्रोथ को सपोर्ट करेगी और कंपनी की लोन देने की क्षमता को बढ़ाएगी।

यह कदम Mufin Green Finance की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले भी कंपनी ने दिसंबर 2025 में ₹90 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) और फरवरी 2026 में ₹100 करोड़ के NCDs जारी किए थे। साथ ही, कंपनी ने Finnfund से $12 मिलियन (लगभग ₹109 करोड़) का टर्म लोन भी लिया था।

शर्तें और संभावित अड़चनें

हालांकि, यह सैद्धांतिक मंजूरी कुछ सख्त शर्तों के साथ आई है। इनमें सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के नियमों का कड़ाई से पालन करना शामिल है। साथ ही, NSE की सलाह के अनुसार, अलॉटीज़ (allottees) द्वारा किए जाने वाले ट्रेडों से जुड़े इंटरनल कंट्रोल्स (internal controls) को मजबूत करना सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। ये शर्तें पूंजी बाज़ार के लेन-देन में नियामक जांच की ओर इशारा करती हैं, खासकर प्रीफरेंशियल अलॉटमेंट के मामले में।

निवेशक बारीकी से नज़र रखेंगे कि Mufin Green Finance इन शर्तों को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा करती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि कंपनी ने पहले भी प्रीफरेंशियल इश्यूज़ के साथ जटिलताओं का सामना किया है। जनवरी 2026 में, कंपनी ने वैल्यूएशन के लिए ज़रूरी रेगुलेटरी अप्रूवल (regulatory approval) में देरी के कारण, नॉन-कैश कंसीडरेशन (non-cash consideration) के लिए इक्विटी शेयरों से जुड़े प्रीफरेंशियल इश्यू के एक हिस्से को वापस ले लिया था। यह पिछली घटना भविष्य की पूंजी जुटाने की कोशिशों के लिए समय पर और नियमों के अनुसार निष्पादन के महत्व को दर्शाती है।

वित्तीय स्थिति और बाज़ार में जगह

Mufin Green Finance एक खास लेकिन तेज़ी से बढ़ते सेगमेंट में काम करती है। FY2025 तक, कंपनी ने लगभग ₹20 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। 31 मार्च, 2025 तक इसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 25.99 प्रतिशत था, जो इसके वर्तमान संचालन के पैमाने के लिए एक अच्छी तरह से पूंजीकृत स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, Bajaj Finance या Shriram Finance जैसी बड़ी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) की तुलना में Mufin एक छोटी कंपनी है, जिसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹2,000 करोड़ है। ग्रीन फाइनेंस पर कंपनी का फोकस एक ऐसे बाज़ार में एक अलग रणनीतिक लाभ प्रदान करता है जहाँ स्थायी निवेशों को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है।

जोखिम और भविष्य की दिशा

इस प्रीफरेंशियल इश्यू से जुड़े मुख्य जोखिम एक्सचेंज और SEBI द्वारा बताई गई शर्तों को सफलतापूर्वक पूरा करने पर निर्भर करते हैं। किसी भी देरी या गैर-अनुपालन से अंतिम मंज़ूरी खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा, पिछले प्रीफरेंशियल इश्यू की वापसी नियामक प्रक्रियाओं से निपटने में संभावित निष्पादन चुनौतियों को उजागर करती है। निवेशकों को प्रमोटर शेयरहोल्डिंग (promoter shareholding) के रुझानों पर भी नज़र रखनी चाहिए; हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि प्रमोटर की हिस्सेदारी स्थिर है, हालांकि थोड़ी कम हुई है, लेकिन इसमें कोई बड़ी गिरावट चिंता का कारण बन सकती है।

आगे देखते हुए, Mufin Green Finance की इस प्रीफरेंशियल इश्यू को सफलतापूर्वक पूरा करने और जुटाई गई पूंजी को अपने ग्रीन लेंडिंग पोर्टफोलियो में प्रभावी ढंग से लगाने की क्षमता, इसके निरंतर विकास और बाज़ार में स्थिति के लिए महत्वपूर्ण होगी। कंपनी के प्रदर्शन पर उसके बढ़ते परिचालन पैमाने के बीच एसेट क्वालिटी (asset quality) और लाभप्रदता (profitability) को प्रबंधित करने की क्षमता के लिए बारीकी से नज़र रखी जाएगी।

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