सितंबर 2026 में मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की ग्रोथ महज **9%** रही, जो कि ओवरऑल मोटर इंश्योरेंस मार्केट की **13%** ग्रोथ से काफी कम है। इस सुस्ती के पीछे जून 2026 में आया सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला है, जिसमें होममेकर्स (गृहणियों) के लिए क्लेम लायबिलिटी बढ़ा दी गई है।
बाजार में क्या चल रहा है?
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस में आई यह सुस्ती 'ओन-डैमेज' (Own-damage) सेगमेंट से बिल्कुल अलग है, जिसने 17% की ग्रोथ दर्ज की है। बीमा कंपनियां अब थर्ड-पार्टी की जगह ओन-डैमेज बिजनेस पर जोर दे रही हैं, क्योंकि इसमें मार्जिन बेहतर है और कानूनी जोखिम कम है।
क्यों बढ़ी चिंता?
जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्देश जारी किया था, जिसमें घरेलू काम (Domestic work) को आर्थिक मूल्य दिया गया है। इसका मतलब है कि अब दुर्घटना के मामलों में गृहणियों के लिए कंपनसेशन (मुआवजा) की राशि बढ़ गई है। चूंकि थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है और इसमें प्रीमियम आसानी से नहीं बढ़ाया जा सकता, इसलिए कंपनियों को अपने मुनाफे (Profit) की सुरक्षा के लिए इस सेगमेंट में विस्तार कम करना पड़ रहा है।
SBI General का अलग दांव
जहाँ बाकी प्राइवेट कंपनियां सावधानी बरत रही हैं, वहीं SBI General Insurance ने सबको चौंकाते हुए सितंबर में 32% की ग्रोथ दर्ज की है। अन्य प्राइवेट कंपनियां आमतौर पर इस सेगमेंट में 11% से 20% के बीच ग्रोथ दिखा रही हैं। Kotak Institutional Equities के एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनियां अब कानूनी बदलावों के हिसाब से अपनी पोर्टफोलियो स्ट्रैटेजी बदल रही हैं।
निवेशकों के लिए अब सबसे बड़ा 'वॉच-पॉइंट' लॉस रेशियो (Loss Ratio) है। अगर क्लेम का भुगतान प्रीमियम कलेक्शन से ज्यादा बढ़ता है, तो भविष्य में प्रीमियम में बढ़ोतरी जैसे सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।
