SBI के निवेशकों के लिए अच्छी खबर! Motilal Oswal Securities ने इस सरकारी बैंक पर अपना भरोसा जताया है और 'Buy' रेटिंग के साथ **₹1,370** का नया टारगेट प्राइस तय किया है। यह कदम SBI के Q1 FY27 के शानदार नतीजों के बाद आया है, जिसमें नेट प्रॉफिट **10%** से अधिक बढ़ा है।
SBI की Q1 FY27 परफॉर्मेंस
Motilal Oswal Securities ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) पर अपनी 'Buy' रेटिंग को बरकरार रखा है और शेयर के लिए ₹1,370 का नया टारगेट प्राइस सेट किया है। यह घोषणा SBI के वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही के मजबूत नतीजों के बाद आई है, जिसने बाजार की उम्मीदों को पार कर लिया है।
तिमाही के दौरान, SBI ने ₹21,121 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 10.2% अधिक है। इस वृद्धि में नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) का बड़ा योगदान रहा, जो 14% बढ़कर ₹46,990 करोड़ हो गई। इसके अलावा, ऑपरेटिंग खर्चों को नियंत्रित करने और ट्रेजरी गेन्स का फायदा उठाने से भी कंपनी के मुनाफे को बल मिला।
एसेट क्वालिटी और लोन ग्रोथ पर Motilal Oswal की नजर
ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, SBI की घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 3% पर स्थिर बनी हुई है, जो पूरे वित्तीय वर्ष के लिए बैंक के गाइडेंस के अनुरूप है। SBI ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए अपने लोन बुक में 14-15% की वृद्धि का लक्ष्य रखा है, जिसे अर्थव्यवस्था में स्थिर वृद्धि की उम्मीदों से सहारा मिल रहा है। रिटेल, कृषि और एसएमई जैसे सेक्टर्स ने विस्तार में योगदान दिया है, हालांकि कॉर्पोरेट लोन ग्रोथ तिमाही-दर-तिमाही सपाट रही है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
एसेट क्वालिटी की बात करें तो, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) 1.47% और नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPA) 0.38% पर रहीं। इन स्तरों से लोन रिपेमेंट की स्थिति स्थिर दिखती है। हालांकि, तिमाही के दौरान ₹73.6 बिलियन के फ्रेश स्लिपेज (नए डूबे कर्ज) देखे गए, जो बैंकिंग में एक मौसमी प्रवृत्ति हो सकती है, लेकिन यह क्रेडिट क्वालिटी की निरंतर निगरानी की आवश्यकता को दर्शाता है।
जोखिम और आगे की राह
हालांकि आउटलुक सकारात्मक है, निवेशकों को बैंकिंग सेक्टर के व्यापक चुनौतियों से अवगत रहना चाहिए। डिपॉजिट्स पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण बैंकों के लोन से होने वाली कमाई पर असर पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, SBI का प्रदर्शन ब्याज दरों में बदलाव और आर्थिक स्थितियों के प्रति संवेदनशील है। यदि घरेलू अर्थव्यवस्था अनुमान के अनुरूप वृद्धि नहीं करती है, या डिपॉजिट की लागत बढ़ती रहती है, तो बैंक के लाभ मार्जिन को बनाए रखने की क्षमता पर दबाव आ सकता है।
भविष्य में, शेयरधारकों के लिए मुख्य निगरानी बिंदु यह होगा कि बैंक अपने NIM गाइडेंस को बनाए रखने, कॉर्पोरेट क्रेडिट मांग की रिकवरी और आने वाली तिमाहियों में स्लिपेज को कैसे प्रबंधित करता है। इन क्षेत्रों में बैंक की सफलता यह निर्धारित करेगी कि बदलते वित्तीय परिदृश्य में अनुमानित लक्ष्य प्राप्त करने योग्य बने रहेंगे या नहीं।
