Moneyboxx Finance ने Capri Global Capital से ₹50 करोड़ का कर्ज (Debt) लिया है। इस नई फंडिंग से इस फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का कुल कर्ज **₹70 करोड़** हो गया है, जिसका इस्तेमाल छोटे कारोबारियों को लोन देने के लिए किया जाएगा। हालांकि, कंपनी के शेयर में गिरावट जारी है।
Detailed Coverage
Moneyboxx Finance ने Capri Global से जुटाए ₹50 करोड़
Moneyboxx Finance Limited ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) के जरिए Capri Global Capital से ₹50 करोड़ की रकम जुटाई है। Capri Global Capital इस इश्यू में एकमात्र निवेशक रही है। इस फंड का इस्तेमाल कंपनी ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में अपनी लेंडिंग (Lending) एक्टिविटीज को बढ़ाने के लिए करेगी। इस ताजा डील के साथ, कंपनी ने 2027 के फाइनेंशियल ईयर के पहले चार महीनों में कुल ₹70 करोड़ NCDs के जरिए जुटाए हैं।
छोटे कारोबारियों को मिलेगा फायदा
Moneyboxx Finance छोटे कारोबारियों जैसे कि किराना दुकानदारों, पशुपालकों और छोटे निर्माताओं को ₹1 लाख से ₹25 लाख तक के लोन देती है। इस नए फंड से कंपनी अपने टारगेट एरिया में लोन बांटने की क्षमता को बढ़ाएगी, जहाँ छोटे कारोबारियों के लिए औपचारिक कर्ज (Formal Credit) मिलना अभी भी एक चुनौती है। कंपनी की 12 राज्यों में 150 से ज्यादा ब्रांचेज हैं।
शेयर में दबाव जारी
हालांकि कंपनी अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए कर्ज ले रही है, लेकिन बाजार में उसके शेयर पर दबाव बना हुआ है। मंगलवार को Moneyboxx Finance का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 3.21% गिरकर ₹56.33 पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में शेयर में करीब 20% की गिरावट आई है। इस साल अब तक शेयर 9.68% नीचे आ चुका है, जो निफ्टी 50 इंडेक्स की तुलना में कमजोर परफॉर्मेंस को दर्शाता है।
लगभग ₹391 करोड़ के मार्केट कैप वाली Moneyboxx Finance का वैल्यूएशन अभी भी काफी हाई है। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो 370.06 है। निवेशक अक्सर ऐसे हाई वैल्यूएशन पर बारीकी से नजर रखते हैं, क्योंकि यह भविष्य में प्रॉफिट ग्रोथ की उम्मीदों को दिखाता है। कंपनी ने अपने कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, HDFC बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे बड़े संस्थानों सहित 34 बैंकों के कंसोर्टियम पर भरोसा किया है। शुरुआत से अब तक कंपनी ₹1,500 करोड़ से ज्यादा का कर्ज जुटा चुकी है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि कंपनी अपने कर्ज पर अत्यधिक निर्भरता को कैसे मैनेज करती है और प्रॉफिट मार्जिन को कैसे स्थिर रखती है। जैसे-जैसे कंपनी अपनी ब्रांच और लोन बुक का विस्तार कर रही है, अपने एसेट्स की क्वालिटी पर नजर रखना जरूरी होगा, खासकर माइक्रो-एंट्रेप्रेन्योर (Micro-entrepreneur) उधारकर्ताओं के रीपेमेंट बिहेवियर पर। इसके अलावा, शेयरधारक इस बात पर भी नजर रखेंगे कि कंपनी इन डेट-फंडेड विस्तारों को आने वाले तिमाही नतीजों में नेट इंटरेस्ट इनकम और ओवरऑल प्रॉफिटेबिलिटी में लगातार ग्रोथ में कितनी प्रभावी ढंग से बदल पाती है।
