MobiKwik Xtra फंसा कानूनी जाल: निवेशकों के पैसे फंसे, RBI की सख्ती

BANKINGFINANCE
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AuthorAditya Rao|Published at:
MobiKwik Xtra फंसा कानूनी जाल: निवेशकों के पैसे फंसे, RBI की सख्ती
Overview

MobiKwik मुश्किलों में घिर गई है। कंपनी के 'Xtra' P2P प्रोडक्ट पर निवेशकों के पैसे के गलत इस्तेमाल के आरोप लगे हैं, जिसके चलते FIR दर्ज हुई है। RBI के नियमों के बाद इंस्टेंट विथड्रॉअल बंद हो गए हैं, और कंपनी का कहना है कि 90% फंड वापस किए जा चुके हैं, लेकिन ग्राहक अभी भी फंसे हुए पैसे और अनधिकृत री-इन्वेस्टमेंट की शिकायत कर रहे हैं।

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रेगुलेटरी एक्शन और 'Xtra' प्रोडक्ट का सच

कभी रिटेल निवेशकों को पीयर-टू-पीयर (P2P) लेंडिंग के जरिए आकर्षक रिटर्न का वादा करने वाला MobiKwik का 'Xtra' प्रोडक्ट अब कानूनी और रेगुलेटरी जांच के घेरे में है। यह प्रोडक्ट Lendbox, जो कि RBI-रजिस्टर्ड NBFC-P2P प्लेटफॉर्म है, के लिए एक डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के तौर पर काम कर रहा था। लेकिन, अगस्त 2024 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सख्त नियमों के बाद इस मॉडल पर ग्रहण लग गया। RBI के नए दिशानिर्देशों ने प्रोडक्ट की लिक्विडिटी (तरलता) वाली खूबियों को खत्म कर दिया, खासकर गारंटीड रिटर्न और फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह तुरंत पैसे निकालने की सुविधा पर रोक लगा दी गई।

कानूनी शिकंजा और परिचालन की दिक्कतें

हाल के हफ्तों में यह मामला रेग्युलेटरी कंप्लायंस से आगे बढ़कर आपराधिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। बेंगलुरु पुलिस ने MobiKwik और इसके लेंडिंग पार्टनर Lendbox के खिलाफ फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) दर्ज की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह प्लेटफॉर्म, जिसे कम-जोखिम और लिक्विड इन्वेस्टमेंट के तौर पर प्रचारित किया गया था, निकासी (Withdrawal) में नाकाम रहा है और काफी पैसा अभी भी ग्राहकों के लिए उपलब्ध नहीं है। इससे भी गंभीर आरोप यह हैं कि ग्राहकों की सहमति के बिना उनके पैसे को नए बॉरोअर अकाउंट्स में अनधिकृत रूप से री-इन्वेस्ट किया गया। MobiKwik का कहना है कि वे सिर्फ डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर के तौर पर काम करते हैं, लेकिन इन शिकायतों का कानूनी वजन और फंड की लगातार अनुपलब्धता रिटेल लेंडर्स के बीच कंपनी की साख पर भारी पड़ रही है।

एसेट क्वालिटी और रिकवरी की चुनौती

इन आरोपों के जवाब में, फिनटेक ग्रुप का कहना है कि बॉरोअर्स द्वारा कुल फंड का 90% से अधिक सफलतापूर्वक वापस कर दिया गया है। कंपनी बाकी बचे बैलेंस को सामान्य रिकवरी और रीपेमेंट प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है। हालांकि, यह आंकड़ा उन निवेशकों के अनुभवों से बिल्कुल अलग है, जिनकी शिकायत है कि उनका पैसा डेढ़ साल से भी अधिक समय से फंसा हुआ है। कंपनी द्वारा बताए गए रीपेमेंट स्टैटिस्टिक्स और व्यक्तिगत निवेशक के अनुभव के बीच का यह अंतर P2P प्लेटफॉर्म की संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर करता है, जहां क्रेडिट रिस्क (डिफॉल्ट और लिक्विडिटी में देरी का जोखिम) सीधे तौर पर प्लेटफॉर्म के बजाय व्यक्तिगत लेंडर पर होता है।

ऑफलाइन एग्रीगेशन की ओर झुकाव

इन चुनौतियों के बीच, कंपनी अपने बिजनेस में विविधता लाने की कोशिश कर रही है। मई 2026 में, इसे RBI से पेमेंट एग्रीगेटर-फिजिकल (PA-P) लाइसेंस के लिए सैद्धांतिक मंजूरी (in-principle approval) मिली है, जो ऑफलाइन मर्चेंट उपस्थिति को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे पहले अप्रैल 2026 में कंपनी ने NBFC लाइसेंस हासिल किया था, जिसका इस्तेमाल वे अपने इन-हाउस क्रेडिट प्रोडक्ट लॉन्च करने के लिए करने का इरादा रखते हैं। FY28 तक मर्चेंट बिजनेस को दस गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखकर, कंपनी स्पष्ट रूप से एक हाई-ग्रोथ, रेगुलेटेड पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर अपनी पहचान बदलने की कोशिश कर रही है। हालांकि, 'Xtra' संकट की छाया अभी भी एक रिस्क फैक्टर बनी हुई है, जो एक इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म से एक इंटीग्रेटेड लेंडिंग और पेमेंट्स पावरहाउस बनने की राह में मुश्किलें पैदा कर रही है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.