Mirae Asset Financial Services ने निवेशकों के लिए 100% डिजिटल लोन सुविधा शुरू की है। यह सुविधा CDSL डीमैट अकाउंट में शेयर रखने वाले निवेशकों के लिए है, जिसमें ₹25,000 से ₹1 करोड़ तक का लोन 10.25% ब्याज दर पर मिलेगा। यह बिना शेयर बेचे तुरंत लिक्विडिटी पाने का ज़रिया है, लेकिन बाज़ार गिरने पर मार्जिन कॉल जैसे जोखिमों से सावधान रहना होगा।
###Mirae Asset का नया डिजिटल ऑफर
Mirae Asset Financial Services, जो Mirae Asset Financial Group की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) है, ने एक नई डिजिटल सर्विस लॉन्च की है। इसके तहत रिटेल निवेशक अपने इक्विटी होल्डिंग्स पर लोन ले सकते हैं। यह खास सुविधा Central Depository Services Ltd. (CDSL) में डीमैट अकाउंट रखने वाले निवेशकों के लिए है, जो भारत का सबसे बड़ा डिपॉजिटरी है।
###डिजिटल प्रक्रिया और लोन की शर्तें
यह सर्विस 'लोन अगेंस्ट शेयर्स' (LAS) की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाती है। पहले इसमें काफी कागज़ी कार्रवाई होती थी और 7 से 10 दिन लगते थे। अब ऑनलाइन अप्लाई, शेयर की प्लेजिंग और अप्रूवल की प्रक्रिया से यह काम सिर्फ एक दिन में हो जाएगा। निवेशक ₹25,000 से लेकर ₹1 करोड़ तक के लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
इस लोन पर सालाना ब्याज दर 10.25% है, जो सिर्फ इस्तेमाल की गई रकम पर ही लगेगी, न कि पूरी सेंक्शन लिमिट पर। सबसे ख़ास बात यह है कि इसमें कोई प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज नहीं है, मतलब आप कभी भी लोन चुका सकते हैं बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के। लोन की राशि आपके द्वारा गिरवी रखे गए शेयरों के वैल्यू पर निर्भर करेगी, जिसे कंपनी मार्केट कैप और प्राइस वोलेटिलिटी के आधार पर तय करेगी।
###रणनीति और निवेशकों के लिए जोखिम
Mirae Asset इस कदम से रिटेल लेंडिंग मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है। यह पारंपरिक बैंक या ऑफलाइन लोन की तुलना में एक टेक-संचालित विकल्प है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर लोन लेने से तुरंत लिक्विडिटी मिल सकती है, बिना अपने लॉन्ग-टर्म निवेश को बेचे। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो बाजार में तेजी के दौरान शेयर बेचने के टैक्स इंप्लिकेशन्स से बचना चाहते हैं।
हालांकि, इक्विटी पर लोन लेने में जोखिम भी जुड़े हैं। सबसे बड़ा जोखिम यह है कि लोन बाज़ार से जुड़े एसेट्स द्वारा सुरक्षित है। अगर गिरवी रखे शेयरों की वैल्यू काफी गिर जाती है, तो लेंडर 'मार्जिन कॉल' जारी कर सकता है। इसके तहत आपको या तो अतिरिक्त कैश या और शेयर बतौर कोलैटरल देने होंगे ताकि लोन-टू-वैल्यू रेशियो बना रहे। अगर आप ऐसा नहीं कर पाते, तो लेंडर लोन की रकम वसूलने के लिए शेयरों को बेच सकता है। इसलिए, यह सुविधा भले ही आसान हो, लेकिन बाज़ार की वोलेटिलिटी से निपटने के लिए अपने पोर्टफोलियो में बफर रखना ज़रूरी है। आगे यह देखना होगा कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को कितना अपनाया जाता है और यह कंपनी के रिटेल लोन बुक ग्रोथ को कैसे प्रभावित करता है।
