Mirae Asset Investment Managers भारतीय शॉर्ट-टर्म कॉर्पोरेट बॉन्ड्स को तरजीह दे रहा है। कंपनी का मानना है कि सरकारी बॉन्ड के मुकाबले इनमें **100 बेसिस पॉइंट** ज्यादा यील्ड (yield) मिल रही है। यह रणनीति इसलिए अपनाई जा रही है क्योंकि कंपनियों द्वारा सस्ता बाहरी कर्ज लेने के कारण कॉर्पोरेट बॉन्ड की सप्लाई घटने की उम्मीद है।
क्यों कॉर्पोरेट बॉन्ड पर दांव?
Mirae Asset Investment Managers ने अब लोकल शॉर्ट-टर्म कॉर्पोरेट बॉन्ड्स की ओर अपना फोकस बढ़ाया है। इसकी वजह सरकारी सिक्योरिटीज के मुकाबले यील्ड (yield) में आई बड़ी बढ़ोतरी है। फर्म के मुताबिक, तीन से पांच साल की अवधि वाले ये बॉन्ड्स अब सरकारी बॉन्ड की तुलना में करीब 100 बेसिस पॉइंट ज्यादा यील्ड दे रहे हैं। यह हाल के महीनों में देखे गए 85-85 बेसिस पॉइंट के स्प्रेड से काफी ज्यादा है।
सप्लाई घटने की उम्मीद
कॉर्पोरेट डेट (corporate debt) की यह बढ़ती मांग बाजार की मौजूदा लिक्विडिटी (liquidity) और सप्लाई के बदलते समीकरणों का नतीजा है। फंड हाउस के एनालिसिस के अनुसार, इस साल कॉर्पोरेट बॉन्ड्स की नई सप्लाई में कमी आने का अनुमान है। सप्लाई में यह कमी इसलिए आ रही है क्योंकि घरेलू कंपनियां अब बाहरी कमर्शियल बोर्रोइंग (ECB) का ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं, जो कि उन्हें सस्ता पड़ता है।
विदेशी बैंकों के लिए भी मौका
जैसे-जैसे कंपनियां बाहरी कर्ज का इस्तेमाल करेंगी, वैसे-वैसे लोकल कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट में सप्लाई कम होती जाएगी, जिससे यील्ड को सपोर्ट मिलेगा। इसके अलावा, विदेशी बैंकों के पास जमा हुए फॉरेन एक्सचेंज डिपॉजिट (foreign exchange deposits) के लिए ये कॉर्पोरेट बॉन्ड्स एक अच्छा निवेश विकल्प साबित हो सकते हैं।
निवेशकों के लिए रणनीति
फिक्स्ड-इनकम पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए, फिलहाल एक साल या उससे कम मैच्योरिटी (maturity) वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्स (debt instruments) में रणनीतिक निवेश बनाए रखने की सलाह है। यह रणनीति उन्हें बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड्स में आसानी से शिफ्ट होने का मौका देगी। फर्म बॉन्ड इंडेक्स में संभावित शामिल होने और भू-राजनीतिक (geopolitical) कारकों जैसे बड़े मैक्रो इकोनॉमिक ट्रिगर्स (macroeconomic triggers) पर भी नजर बनाए हुए है। सरकारी बॉन्ड के मोर्चे पर, 10-वर्षीय बेंचमार्क यील्ड (benchmark yield) के मध्यम अवधि में 6.80% से 6.95% के बीच रहने की उम्मीद है।
निवेशकों को कॉर्पोरेट बॉन्ड इश्यूएंस (issuance) के वॉल्यूम और कंपनियों द्वारा बाहरी कर्ज सुविधाओं के उपयोग की गति पर नज़र रखनी चाहिए। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह यील्ड का फायदा कितना टिकाऊ रहता है। साथ ही, घरेलू लिक्विडिटी की स्थिति भी इन शॉर्ट-टर्म इंस्ट्रूमेंट्स के प्रदर्शन को प्रभावित करेगी।
