Microfinance Institutions Network (MFIN) ने माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के लिए बड़े बदलाव का ऐलान किया है। अगले **18 महीने** में सभी लेंडर्स को लोन देने के लिए PAN और CKYC को अनिवार्य बनाना होगा, जिससे कर्जदारों की सही पहचान हो सके और ओवर-इंडेटनेस (ज्यादा कर्ज) का रिस्क कम हो सके।
बदल रहा है पहचान का तरीका
अब माइक्रोफाइनेंस सेक्टर अपनी पुरानी पहचान पद्धतियों को छोड़कर पूरी तरह डिजिटल होने की राह पर है। MFIN के इस निर्देश के बाद, अगले 18 महीने में संस्थानों को अपने पुराने वोटर आईडी आधारित सिस्टम को हटाकर PAN और CKYC (Central Know Your Customer) को अपनाना होगा। यह बदलाव डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तालमेल बिठाने और ग्राहकों के कर्ज के रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने के लिए किया जा रहा है।
कर्ज की सटीक निगरानी
अब तक लेंडर्स के लिए यह पता लगाना मुश्किल होता था कि एक ग्राहक ने अन्य संस्थानों से कितना कर्ज ले रखा है। PAN की सीडिंग से लेंडर्स को ग्राहक की टोटल डेट एक्सपोजर (कुल कर्ज) की साफ तस्वीर दिखेगी। इससे ओवर-इंडेटनेस को रोकने में मदद मिलेगी और रिटेल बैंकिंग की तरह पारदर्शिता बढ़ेगी।
रिस्क मैनेजमेंट और नए सुरक्षा कवच
हाल के वर्षों में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बहुत तेज ग्रोथ देखी गई है, लेकिन प्रतिस्पर्धा के चक्कर में कभी-कभी क्रेडिट असेसमेंट में ढील दी गई थी। इससे कुछ क्षेत्रों में तनाव बढ़ा था। इस रिस्क को कम करने के लिए पहले से ही 3 लेंडर्स की कैप और ₹2 लाख तक का कुल कर्ज का नियम है। PAN और CKYC का नया सिस्टम इन सुरक्षा नियमों को और सख्ती से लागू करने में मदद करेगा।
पोर्टफोलियो में बदलाव की तैयारी
सेक्टर अब सिर्फ असुरक्षित (unsecured) लोन पर निर्भर नहीं रहना चाहता। कई कंपनियां अब लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी, व्हीकल फाइनेंसिंग और गोल्ड-लोन जैसे सिक्योर प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ा रही हैं। निवेशक अब यह देखेंगे कि बड़ी कंपनियां इसे कितनी तेजी से लागू करती हैं और छोटे लेंडर्स को सिस्टम अपडेट करने में कितनी चुनौती आती है। लंबी अवधि में इससे एसेट क्वालिटी में सुधार और लोन डिफॉल्ट कम होने की उम्मीद है।
