बाजार में जारी सुस्ती के बीच Nifty 50 में **13%** की गिरावट आई है, लेकिन मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयर **13%** चढ़ गए हैं। इन 'टोल रोड' मॉडल वाली कंपनियों ने निवेशकों की संपत्ति में **₹1.22 लाख करोड़** का इजाफा किया है, लेकिन अब निवेशकों की नजर SEBI के नए नियमों पर टिकी है।
भारतीय शेयर बाजार में इस समय एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जहां Nifty 50 इंडेक्स में इस साल अब तक 13% की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियां—जैसे एक्सचेंज ऑपरेटर, ब्रोकर्स और एसेट मैनेजर्स—उल्टी दिशा में दौड़ रहे हैं। Nifty Capital Markets इंडेक्स में 13% की तेजी आई है, जिससे निवेशकों को ₹1.22 लाख करोड़ का फायदा हुआ है।
'टोल रोड' बिजनेस मॉडल का जादू
मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को अक्सर वित्तीय सिस्टम की 'टोल रोड' कहा जाता है। इनका बिजनेस मॉडल ट्रांजेक्शन वॉल्यूम और एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) पर निर्भर करता है। बाजार में जब अस्थिरता (volatility) बढ़ती है, तो ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ जाता है, जिससे इन कंपनियों की फीस इनकम में भारी उछाल आता है।
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे इसका सबूत हैं। BSE Ltd का नेट प्रॉफिट 62% बढ़कर ₹872.66 करोड़ रहा, जबकि ऑपरेशनल रेवेन्यू 63% उछलकर ₹1,566.02 करोड़ हो गया। इसके अलावा Anand Rathi Wealth, Motilal Oswal Financial Services और Angel One जैसी कंपनियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है।
SIP का सपोर्ट और रेगुलेटरी रिस्क
ट्रेडिंग वॉल्यूम के अलावा, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए आने वाला रिटेल निवेश इन कंपनियों के लिए एक ढाल की तरह काम कर रहा है।
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ा जोखिम SEBI की ओर से आने वाले रेगुलेटरी बदलाव हैं। डेरिवेटिव्स (derivatives) में सट्टेबाजी को रोकने के लिए बाजार नियामक लगातार नए नियमों पर विचार कर रहा है। यदि मार्जिन की शर्तें सख्त होती हैं या ट्रेडिंग लिमिट तय की जाती है, तो इसका सीधा असर इन कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है। इसके अलावा, ऊंचे वैल्यूएशन के चलते निवेशकों को अब सतर्क रहने की भी जरूरत है, क्योंकि उम्मीदों से कम नतीजे आने पर इन स्टॉक्स में करेक्शन की आशंका बनी रहेगी।
