सितंबर 2026 के मार्केट डेटा से साफ है कि अब निवेशक उन बैंकों पर भरोसा जता रहे हैं जहां के CEO ने संस्थागत बदलाव (Institutional Turnaround) किए हैं। ICICI Bank और IDFC First Bank जैसे नाम स्थापित दिग्गजों को पीछे छोड़ रहे हैं।
मार्केट में आजकल एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जिसे एक्सपर्ट्स 'रिस्ट्रक्चरिंग प्रीमियम' कह रहे हैं। निवेशक अब पुराने ब्रांड्स की स्थिरता के बजाय उन बैंकों को अधिक वैल्यू दे रहे हैं जो अपनी खराब संपत्तियों को साफ कर रहे हैं और बिजनेस मॉडल में बड़े बदलाव ला रहे हैं।
संस्थागत सुधार का जलवा
ICICI Bank के CEO संदीप बख्शी की रणनीति बाजार को खूब पसंद आई है। उन्होंने 2018 में 3.6% रहे ग्रॉस NPA को घटाकर फाइनेंशियल ईयर 2026 तक 1.4% के स्तर पर ला खड़ा किया है। वहीं, IDFC First Bank के V. Vaidyanathan ने होलसेल बैंकिंग से हटकर रिटेल पोर्टफोलियो पर दांव खेला, जिससे बैंक की प्रॉफिटेबिलिटी में जबरदस्त उछाल आया है।
दिग्गजों के सामने बड़ी चुनौती
HDFC Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे स्थापित दिग्गजों के सामने फिलहाल नए ग्रोथ कैटालिस्ट की कमी है। HDFC Bank में लीडरशिप बदलाव का दौर चल रहा है और CEO शशिधर जगदीशन के अक्टूबर 2026 में रिटायरमेंट से पहले निवेशक किसी बड़े ट्रिगर का इंतजार कर रहे हैं। बैंकिंग सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ 16.5% साल-दर-साल रही है, लेकिन स्थिर बैंकों के मुकाबले टर्नअराउंड वाले शेयरों में तेजी ज्यादा आक्रामक है।
निवेशकों के लिए काम की बात
अब बैंकिंग स्टॉक्स को परखने का पैमाना बदल गया है। सिर्फ बैंक का नाम न देखें, बल्कि CEO के उन कदमों पर नजर रखें जिनसे बैलेंस शीट सुधर रही हो। ग्रॉस NPA रेशियो और रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) जैसे मेट्रिक्स पर नजर रखना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है।
