Manipal Health Enterprises का **9,275 करोड़** रुपये का IPO आज, 29 जुलाई को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड **₹560-₹590** प्रति शेयर तय किया है। इस इश्यू से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में इस्तेमाल होगा, वहीं निवेशक कंपनी की विस्तार योजनाओं और वैल्यूएशन पर भी गौर कर रहे हैं।
IPO का पूरा ब्यौरा
Manipal Health Enterprises ने आज, 29 जुलाई से अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) सब्सक्रिप्शन के लिए खोल दिया है। यह पब्लिक इश्यू 31 जुलाई तक खुला रहेगा और इसका प्राइस बैंड ₹560 से ₹590 प्रति शेयर रखा गया है। रिटेल निवेशक कम से कम 25 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, जिससे ऊपरी प्राइस बैंड पर न्यूनतम आवेदन राशि ₹14,750 हो जाती है।
IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल और कर्ज का बोझ
इस IPO में ₹8,000 करोड़ का फ्रेश इश्यू और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 2.16 करोड़ शेयरों तक की ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। इस फंड जुटाने का एक मुख्य उद्देश्य कंपनी के कर्ज को कम करना है। कंपनी की फाइलिंग के अनुसार, फ्रेश इश्यू से लगभग ₹5,552.7 करोड़ का इस्तेमाल मौजूदा कर्ज चुकाने में किया जाएगा, जबकि ₹574 करोड़ सहयाद्री हॉस्पिटल्स में बाकी हिस्सेदारी खरीदने के लिए रखे गए हैं। मार्च 2026 तक, कंपनी पर कुल ₹11,185 करोड़ का कर्ज था। इस कर्ज को कम करना कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत करने और भविष्य में ब्याज भुगतान को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
कंपनी का फाइनेंशियल परफॉरमेंस और ग्रोथ
Manipal Health वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट हॉस्पिटल चेन में से एक है, जिसके पास 14 राज्यों में फैले 49 हॉस्पिटल और 13,037 बेड का नेटवर्क है। कंपनी ने कोलंबिया एशिया और सहयाद्री हॉस्पिटल्स के अधिग्रहण सहित कई रणनीतिक कदमों से ग्रोथ हासिल की है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के अंत तक, कंपनी ने ₹10,520.5 करोड़ का कुल इनकम दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 26% अधिक है। हालांकि, प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव देखा गया है, क्योंकि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹1,081.7 करोड़ से घटकर ₹916.5 करोड़ रह गया।
मार्केट सेंटिमेंट और वैल्यूएशन
बाजार के प्रतिभागियों की ओर से IPO को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है। कुछ एनालिस्ट्स बेंगलुरु, कोलकाता और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में कंपनी की मजबूत बाजार उपस्थिति को एक बड़ा कॉम्पिटिटिव एडवांटेज बता रहे हैं। वहीं, कुछ अन्य ब्रोकरेज फर्मों ने न्यूट्रल रुख अपनाया है, उनका कहना है कि मौजूदा प्राइस बैंड पर मांगी गई वैल्यूएशन कंपनी की कमाई के मुकाबले थोड़ी ज्यादा है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ने हल्की दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन निवेशक इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि क्या कंपनी कर्ज कम होने के बाद अपने मार्जिन में सुधार कर पाएगी।
जो निवेशक इस ऑफर में भाग लेना चाहते हैं, उन्हें फाइनल सब्सक्रिप्शन नंबर्स पर नज़र रखनी चाहिए, जो इंस्टीट्यूशनल और रिटेल डिमांड की जानकारी देंगे। शेयर अलॉटमेंट का आधार 3 अगस्त तक तय होने की उम्मीद है, और स्टॉक 5 अगस्त को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट हो सकता है।
