Manipal Health IPO: शेयरधारकों ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप, कंपनी ने दी सफाई

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AuthorNeha Patil|Published at:
Manipal Health IPO: शेयरधारकों ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप, कंपनी ने दी सफाई

Manipal Health Enterprises अपने आने वाले IPO से पहले ही मुश्किलों में घिर गई है। कंपनी पर उसकी सब्सिडियरी के माइनॉरिटी शेयरधारकों ने शेयर डाइल्यूट करने और रिटर्न के वादे को पूरा न करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, कंपनी ने इन दावों को खारिज किया है।

Detailed Coverage

शेयरधारकों के आरोपों का ब्यौरा

Manipal Hospitals Synergie Private Limited (MHSPL) के माइनॉरिटी शेयरधारकों के एक समूह, जो अमेरिका में रहते हैं, ने कंपनी के IPO से पहले एक कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। ये निवेशक 2006-2009 के अपने निवेश को लेकर चिंता जता रहे हैं।

ये शेयरधारक, जिनके पास MHSPL के 9.5 लाख से ज्यादा इक्विटी शेयर हैं, उनका दावा है कि उन्होंने लगभग ₹6.95 करोड़ का निवेश 15% कंपाउंडेड एनुअल रिटर्न के वादे के साथ किया था। उनका आरोप है कि यह वादा पूरा नहीं किया गया। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा है कि कंपनी ने ऐसी कॉरपोरेट चालें चलीं, जैसे कि सस्ते दामों पर स्वेट इक्विटी शेयर जारी करना, जिससे उनकी हिस्सेदारी कम हो गई। निवेशकों ने एक इंटरनल फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट तक की मांग की है, जिसका एक्सेस उन्हें नहीं दिया गया है।

कंपनी का पक्ष और रेगुलेटरी एंगल

Manipal Health Enterprises ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि उन्होंने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के सभी डिस्क्लोजर नियमों का पालन किया है, और यह सारी जानकारी उनके ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में शामिल है। Manipal Health ने जोर देकर कहा कि रिटर्न के किसी भी पिछले वादे का संबंध उस प्रमोटर ग्रुप से था जो MHSPL के अधिग्रहण से पहले मौजूद था। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इक्विटी निवेश में कानूनी तौर पर फिक्स्ड रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती है।

आंतरिक रिपोर्टों की मांग पर, कंपनी ने कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत उन्हें माइनॉरिटी शेयरधारकों को ऐसी कोई रिपोर्ट देने की कानूनी बाध्यता नहीं है। मैनेजमेंट ने यह भी बताया कि शेयरधारकों के निवास स्थान को लेकर फाइलिंग्स में एक क्लैरिकल एरर था, जिसका किसी कानूनी अधिकार या रिकॉर्ड पर कोई असर नहीं पड़ा। Manipal Hospitals के ग्रुप CFO, समीर अग्रवाल ने कहा कि ये मुद्दे पिछले मैनेजमेंट से जुड़े हैं और कंपनी ने SEBI को जरूरी स्पष्टीकरण दे दिए हैं।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

संभावित निवेशकों को अब SEBI की समीक्षा प्रक्रिया के दौरान इन कानूनी और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं पर कंपनी के जवाब पर नजर रखनी होगी। यह देखना अहम होगा कि क्या इन विवादों का IPO की टाइमलाइन या वैल्यूएशन पर कोई असर पड़ता है। अंतिम फैसला भविष्य की फाइलिंग्स, मैनेजमेंट के गवर्नेंस पर कमेंट्री और इन विवादों के नियामक या कानूनी समाधान पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.