📉 फाइनेंसियल डीप डाइव: कैसे आई इतनी बड़ी उछाल?
Mahindra & Mahindra Financial Services (M&M Finance) ने 'Udaan' ट्रांसफॉर्मेशन के बाद ग्रोथ की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए, Q3 FY26 के लिए ज़बरदस्त नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के Profit After Tax (PAT) में पिछली तिमाही (QoQ) की तुलना में 59% की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है। इसके साथ ही, Net Interest Margins (NIMs) सुधरकर 7.5% पर पहुंच गए, जो कि एक बड़ा संरचनात्मक सुधार है (पहले ये लगभग 6.5% थे)। 9 महीनों (9MFY26) में NIMs 7.1% रहे। कंपनी का Return on Assets (ROA) Q3 FY26 में बढ़कर 2.5% हो गया, जबकि 9MFY26 में यह 1.9% था।
9MFY26 में फी और अन्य इनकम (Fee and other income) एसेट्स का 1.4% रहीं, जो पिछले साल की समान अवधि (9MFY25) के 1.1% से ज़्यादा है। कंपनी की एसेट क्वालिटी में भी लगातार सुधार दिख रहा है। Gross Stage 3 (GS3) एसेट्स Q3 FY26 में घटकर 3.8% पर आ गए, जो पिछली तिमाही (QoQ) से 14 bps और पिछले साल (YoY) से 13 bps कम है। यह लगातार आठवां ऐसा क्वार्टर है जब GS2+GS3 एसेट्स 10% से नीचे रहे हैं।
Q3 FY26 के लिए Credit Cost 1.3% रहा, जो मैनेजमेंट के लक्ष्य 1.5%-1.7% के दायरे में है। हालांकि, नए ECL मॉडल के तहत ₹635 करोड़ का एक महत्वपूर्ण मैनेजमेंट ओवरले (Management overlay) प्रोविजन किया गया है, जो भविष्य के लिए कंपनी की सतर्कता को दर्शाता है, भले ही यह वर्तमान P&L को प्रभावित न करे।
Disbursements की बात करें तो, कुल डिस्पर्समेंट में 7% YoY और 30% QoQ की बढ़ोतरी हुई है। इनमें सबसे खास ट्रैक्टर फाइनेंस सेगमेंट रहा, जिसमें 65% YoY की शानदार ग्रोथ दर्ज की गई। यह Q3 के लिए अब तक का सबसे ज़्यादा डिस्पर्समेंट रहा। MSME बिजनेस भी तेजी से बढ़ रहा है और ₹8,000 करोड़ के आंकड़े को छू रहा है।
मैनेजमेंट की ग्रोथ और डाइवर्सिफिकेशन की नई राह:
M&M Finance के मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया है कि 'Udaan' ट्रांसफॉर्मेशन पूरा होने के बाद अब पूरा फोकस ग्रोथ पर है। कंपनी का लक्ष्य अंतरिम तौर पर 2% ROA हासिल करना है, और लंबी अवधि में 15% ROE को टारगेट करना है। इस ग्रोथ को sustaIn करने के लिए ऑपरेशनल परफॉरमेंस, टेक्नोलॉजी और डिजिटल पहलों पर जोर दिया जा रहा है।
रणनीतिक डाइवर्सिफिकेशन के तहत, M&M Finance पहियों वाले फाइनेंस (Wheels finance) पर अपनी निर्भरता कम कर रही है, जिसका शेयर वर्तमान में 88% है। कंपनी का लक्ष्य FY30 तक इसे घटाकर 70% करना है। इसके लिए, यह अपनी हाउसिंग फाइनेंस सब्सिडियरी (MRHFL) के मर्जर पर विचार कर रही है और MSME बिजनेस का विस्तार कर रही है। लंबी अवधि में लोन बुक ग्रोथ mid-to-high teens CAGR की उम्मीद है।
जोखिम और आगे का रास्ता:
निवेशकों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि पहियों वाले फाइनेंस से हटकर मॉर्गेज और MSME जैसे नए सेगमेंट्स में जाना एक चुनौतीपूर्ण काम हो सकता है, और इसकी सफलता एग्जीक्यूशन पर निर्भर करेगी। ECL मॉडल के इस्तेमाल से प्रोविजन्स में बदलाव आ सकते हैं। कंपनी के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि वह हालिया डिस्बर्समेंट मोमेंटम को बनाए रखे और अपने बढ़े हुए NIMs को स्थिर कर सके। साथ ही, 17.4% के मजबूत Capital Adequacy (Tier 1 ratio) के साथ, कंपनी वित्तीय रूप से सुदृढ़ दिख रही है।